Sunday, August 18

बेटियां बचाओगे तभी बेटियां पढ़ा पाओगे-कुसुम तोमर।

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लात्कार शब्द सुनते ही मन मे घृणा उतपन्न हो जाती है। शरीर मे सिहरन हो जाती है, मगर जो इस लो अंजाम देते हैं, उनके जमीर इंसानियत नाम की चीज होती है कि नही जो 60 साल की बुजुर्ग हो या 2 से 3 साल की बच्ची सब पर गिध्द की नजर रखते हैं। नोचने को तैयार बैठे हैं।

दामिनी, आसिफा और अब टिवंकल के साथ जो बर्बरता हुई है, उसको देखकर तो लगता है कि इंसान की खाल में पता नही कोन भेड़िया हमारे आस-पास घूम रहा है। कभी कपड़ों के नाम पर अपनी हवस का शिकार बनाता है, तो कोई बदले के लिए बहन बेटियों को नोच रहा है। एक छोटी सी बच्ची क्या कपड़े पहनेगी? एक 60 साल की महिला क्या कपड़े पहनेगी ? पुरुष समाज बता दे…
मगर इस तरह छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बर्बरता मत करो। क्या बिगाड़ा था उस छोटी सी टिवंकल ने जो उसकी ये हालत बना दी इन जानवरों ने। मानसिक कुपोषण के शिकार, संस्कारहीन ऐसे लोगों की समाज मे कोई जगह नही होनी चाहिए। ऐसे कुकृत्य करने वाले चाहे वों किसी भी जाति धर्म के हो उनके लिए किसी के दिल मे दया भाव नही होना चाहिए। हमारे देश का कानून भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार भी सामने खड़ा नजर आता है। क्योंकि ऐसे केस पर तुरंत और कड़ी से कड़ी कार्यवाही नही होती आखिर क्यांे इन भेड़ियों को जेलों में वर्षों वर्ष पाला जाता है। सिर्फ कानून बनाने से कुछ नही होगा, कानून का सख्ती से पालन होना बहुत जरूरी है। एक दूसरे को कोसने और बोलने से बेहतर होगा कि हम सब मिलकर आवाज उठाये। मगर अब ऐसे कृत्यों पर भी लोग राजनीति करते हैं धर्म देखर विरोध जताते हैं, कुछ बोलते हैं कि रात को लड़की बाहर निकली ही क्यों हैं, ऐसे छोटे कपड़े क्यों पहनती है।
मगर 3 साल की टिवंकल को दिन में ही अपनी हवस और हैवानियत का शिकार बना दिया। अब क्या बोलेंगे वो लोग। जिस देश मे नदियां, पहाड़, गाय को माता का दर्जा दिया गया है, वहाँ आज छोटी-छोटी कन्याआंे को नोचा जा रहा है और बहुत ही ज्यादा शर्मनाक बात है।
हम मोंन हैं चार दिन शोर मचाएंगे फिर शांत बैठ जाएंगे क्यां नही हम इस लड़ाई को जारी रखंे ताकि फिर कोई दामिनी या टिवंकल के साथ हैवानियत ना हो पाए क्योंकि हम अपने आस-पास रहने वाले ऐसे भेड़ियों की पहचान नही कर पाते। आखिर कब तक ये चलेगा। मन बहुत दुखी और बेचेंन है। हम सब बोलते हैं कि बेटी पढ़ाओं मगर मैं ये कहती हूं कि बेटी बचाओं क्योकि बेटी बचेगी, तभी तो पढ़ेगी बेटी, मां-बाप के दिल मे इतनी दहशत हो जाती ऐसी घिनोनी घटनाओं के बाद कि वो बच्चियों की पढ़ाई छुड़ाकर घर मे बिठा लेते है। जब एक औरत समाज मे सुरक्षित नही है, तो वो बेटी क्यों पैदा करना चाहेगी। दुनिया को नोचने के लिए टिवंकल के लिए…..
मन मे बहुत दुख और दर्द है उस बच्ची को न्याय मिले ऐसा हम सब मिलकर प्रयास करेंगे। साथ ही साथ मेरा समाज से निवेदन हैं कि ऐसे भेड़ियों को पहचानों वो हम सबके बीच मे ही होते हैं जो औरतों को देखकर गन्दी- गन्दी गालियां देते है और साथ के लोग हंसकर टाल देते हैं। ऐसे ही लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं और सभी अभिभावकों से भी निवेदन है कि अपने बेटों को अच्छे संस्कार दें महिलाएं की इज्जत करना सिखाये। ऐसे बलात्कारियों को फांसी नही तड़पा-तड़पा कर सरेआम चैराहे पर सजा देनी चाहिए ताकि लोगों में ऐसा सोचने से पहले दहशत हो जाये।
टिवंकल बेटा हम सब जिम्मेदार हैं तुम्हारे साथ हुए ऐसी कुकृत्य में क्योंकि हम अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं हम नही देखते की आस-पास आखिर हो क्या रहा है बस सब अपनी-अपनी दौड़ में लगे हैं।

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