Friday, October 18

आम बजट-2019

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राहुल शर्मा

नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज लोकसभा में 2019-20 का केन्द्रीय बजट पेश करते हुए अनेक ऐसे कर प्रस्तावों की घोषणा की जिनका उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकी वाले उदीयमान उद्योगों और स्टार्ट-अप्स में निवेश को बढ़ावा देना है। आर्थिक विकास के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना का शुभारंभ किया जाएगा जिसके तहत सेमी-कंडक्टर फैब्रिकेशन (एफएबी), सोलर फोटो वोल्टिक सेल, लिथियम स्टोरेज बैटरियों, सोलर इलेक्ट्रिक चार्जिंग बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, लैपटॉप और कम्प्यूटर सर्वर जैसे उदीयमान एवं उन्नत प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में बड़े विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना के लिए एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए वैश्विक कंपनियों को आंमत्रित किया जाएगा। इन वैश्विक कंपनियों को आयकर अधिनियम की धारा 35 एडी के तहत निवेश से जुड़ी आयकर छूट के साथ-साथ अन्य अप्रत्यक्ष कर लाभ दिए जाएंगे।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने अपना प्रथम बजट पेश करते हुए कहा कि तथाकथित ‘एंजल टैक्स’ मुद्दे को सुलझाने के लिए अब से शेयर प्रीमियम के मूल्यांकन के मामले में स्टार्ट-अप्स के साथ-साथ उन निवेशकों की कोई जांच नहीं की जाएगी जो अपने रिटर्न में आवश्यक घोषणाओं एवं सूचनाओं का उल्लेख करते हैं। निवेशक की पहचान के साथ-साथ उसकी धनराशि के स्रोत का पता लगाने के मुद्दे को ‘ई-सत्यापन’ की एक समुचित व्यवस्था स्थापित कर सुलझाया जाएगा। इसके साथ ही स्टार्ट-अप्स द्वारा जुटाई गई धनराशि की किसी भी तरह की जांच आयकर विभाग द्वारा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टार्ट-अप्स के लंबित आकलन और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए सीबीडीटी द्वारा विशेष प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जाएंगी। इस तरह के मामलों में कर-निर्धारण अधिकारी के सुपरवाइजर अधिकारी की मंजूरी मिले बगैर कोई भी जांच अथवा सत्यापन नहीं कराया जा सकता है। स्टार्ट-अप्स के लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि वे श्रेणी-II के वैकल्पिक निवेश फंडों को भी जारी किए गए अपने शेयरों के बाजार मूल्य को जायज ठहराए। इन फंडों को जारी किए गए शेयरों का मूल्यांकन आयकर जांच के दायरे से बाहर होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि स्टार्ट-अप्स के मामले में नुकसान को आगे ले जाने और समायोजित करने के लिए कुछ शर्तों में ढील देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, स्टार्ट-अप्स में निवेश के लिए आवासीय मकान की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ की छूट की अवधि को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।

किफायती आवास


किफायती आवास को 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त टैक्स कटौती के रूप में और ज्यादा प्रोत्साहन दिया गया है। यह अतिरिक्त कटौती 45 लाख रुपये तक के मूल्य वाले किफायती मकान की खरीद के लिए 31 मार्च, 2020 तक लिए गए कर्ज पर अदा किए गए 2 लाख रुपये के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स कटौती के अलावा होगी। वित्तमंत्री ने कहा, ‘इस कदम की बदौलत किफायती मकान खरीदने वाले व्यक्ति को अब 3.5 लाख रुपये की बढ़ी हुई ब्याज संबंधी टैक्स कटौती का लाभ मिलेगा। इससे मध्यम वर्ग के मकान खरीदारों को 15 वर्षों की अपनी कर्ज अवधि के दौरान लगभग 7 लाख रुपये का लाभ मिलेगा।’

कर प्रशासन का आधुनिकीकरण

स्व-रोजगार वाले लोगों, छोटे व्यापारियों, वेतनभोगी व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों सहित करदाताओं का धन्यवाद करते हुए सीतारामन ने कहा, ‘पिछले दो वर्षों के दौरान प्रत्यक्ष कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2013-14 के 6.38 लाख करोड़ रुपये से 78 प्रतिशत से भी अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 में लगभग 11.37 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इसमें अब हर साल दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।’ वित्त मंत्री ने कहा कि सर्वाधिक कमाई करने वाले लोगों को देश के विकास के साथ-साथ राजस्व जुटाने में और ज्यादा योगदान करने की जरूरत है। इस बात का उल्लेख करते हुए वित्तमंत्री ने 2-5 करोड़ रुपये की कर योग्य आय वाले लोगों पर अधिभार में 3 प्रतिशत की वृद्धि और 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कर योग्य आमदनी वाले लोगों पर अधिभार में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की घोषणा की।

कॉरपोरेट टैक्स

वित्तमंत्री ने कॉरपोरेट टैक्स का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हम दरों में चरणबद्ध कमी करने का क्रम जारी रखेंगे। वर्तमान में 25 प्रतिशत की कम दर केवल उन कंपनियों पर लागू है जिनका वार्षिक कारोबार 250 करोड़ रुपये तक है। इसका दायरा अब बढ़ाकर उन कंपनियों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है जिनका वार्षिक कारोबार 400 करोड़ रुपये तक है। अब इसके दायरे में 99.3 प्रतिशत कंपनियां आ जाएंगी। इसके साथ ही अब केवल 0.7 प्रतिशत कंपनियां ही इस रेट के दायरे से बाहर होंगी।’

डिजिटल भुगतान

देश में डिजिटल भुगतान के तौर-तरीकों को और ज्यादा प्रोत्साहित करने तथा नकद भुगतान को हतोत्साहित करने के लिए वित्तमंत्री ने अनेक उपायों की घोषणा की। कारोबार संबंधी भुगतान नकद में किए जाने को हतोत्साहित करना और किसी बैंक खाते से एक साल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी निकालने पर 2 प्रतिशत टीडीएस लगाने का प्रस्ताव इन उपायों में शामिल हैं। 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के वार्षिक कारोबार वाले कारोबारी प्रतिष्ठान अपने ग्राहकों को किफायती डिजिटल भुगतान की सुविधा देंगे और ग्राहकों के साथ-साथ व्यवसायियों पर भी कोई प्रभार अथवा मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं थोपा जाएगा। आरबीआई और बैंक उस बचत से इस भार को वहन करेंगे जो उन्हें लोगों द्वारा डिजिटल साधनों को बढ़ावा देने के परिणामस्वरूप अपेक्षाकृत कम नकदी के संचालन से हासिल होगी। इस तरह के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए आयकर अधिनियम और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन

देश में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर दोनों से ही संबंधित प्रोत्साहनों की घोषणा की जाती है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘भारत के विशाल उपभोक्ता आधार को ध्यान में रखते हुए हमने भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण का एक वैश्विक हब बनाने की परिकल्पना की है।’ उन्होंने कहा कि सोलर स्टोरेज बैटरियों और चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को उपर्युक्त योजना में शामिल करने से हमारे प्रयासों को काफी बढ़ावा मिलेगा। वित्तमंत्री ने घोषणा की, ‘सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए जीएसटी परिषद से पहले ही अनुरोध कर चुकी है। इतना ही नहीं, उपभोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को किफायती बनाने के लिए हमारी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने हेतु लिए गए ऋण पर अदा किए गए ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर कटौती मुहैया कराएगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए लोन लेने वाले करदाताओं को कर्ज अवधि के दौरान तकरीबन 2.5 लाख रुपये का लाभ मिलेगा।’ वित्तमंत्री ने ऑटोमोबाइल और वाहनों के कलपुर्जों पर सीमा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के कुछ विशेष कलपुर्जों पर सीमा शुल्क से छूट मुहैया कराई थी।

सीमा शुल्क प्रस्ताव

आमतौर पर अन्य सीमा शुल्क प्रस्तावों का उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना, एमएसएमई सेक्टर को संरक्षण देना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और गैर-आवश्यक आयात पर अंकुश लगाना है। घरेलू उद्योग को समान अवसर प्रदान करने के लिए 36 वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैंः

1. काजू गरी
2. फैटी एसिड, ओलियोकेमिकल एवं साबुन बनाने में उपयोग होने वाले परिशोधन से प्राप्त एसिड ऑयल
3. पॉली विनाइल क्लोराइड
4. प्लास्टिक का फ्लोर कवर, प्लास्टिक की वॉल अथवा सीलिंग कवरिंग
5. प्लास्टिक की वस्तुएं
6. ब्यूटाइल रबर
7. क्लोरोब्यूटाइल रबर अथवा ब्रोमोब्यूटाइल रबर
8. यूजप्रिंट और पत्रिकाओं के लिए कागज
9. मुद्रित पुस्तकें (कवर सहित) और मुद्रित नियमावली
10. ऑप्टिक फाइबर केबल बनाने के लिए वाटर ब्लॉकिंग टेप
11. सिरामिक रूफिंग टाइल एवं सिरामिक फ्लैग एवं पेविंग, दीवारों पर लगाई जाने वाली टाइलें इत्यादि
12. स्टेनलेस स्टील के उत्पाद
13. अन्य एलॉय स्टील के तार (आईएनवीएआर को छोड़)
14. फर्नीचर, दरवाजे, सीढ़ी, खिड़की के लिए उपयुक्त मानी जाने वाली बेस मेटल फिटिंग्स, माउंटिंग और इसी तरह की वस्तुएं
15. स्प्लिट-सिस्टम एयर कंडीशनर की इंडोर एवं आउटडोर यूनिट
16. सड़कों के निर्माण के लिए स्टोन क्रशिंग (कोन प्रकार) संयंत्र
17. सीसीटीवी कैमरा, आईपी कैमरा और डीवीडी एनवीआर का चार्जर पावर एडैप्टर
18. लाउडस्पीकर
19. डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) और नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (एनवीआर)
20. सीसीटीवी कैमरा और आईपी कैमरा
21. ऑप्टिकल फाइबर, ऑप्टिकल फाइबर बंडल एवं केबल
22. ब्रेक, क्लच इत्यादि के लिए घर्षण सामग्री और उससे बने उत्पाद (शीट, रॉल, स्ट्रिप, सेगमेंट, डिस्क, वॉशर, पैड), जिनमें आधार के रूप में एसबेस्टस, अन्य खनिज पदार्थ या सेल्युलोज हो, भले ही ये कपड़ा अथवा अन्य सामग्री से युक्त हों या नहीं
23. रियर-व्यू मिरर सहित ग्लास मिरर, चाहे उनकी फ्रेमिंग हुई हो या न हुई हो
24. मोटर वाहनों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रकार का लॉक
25. कैटेलाइटिक कन्वर्टर
26. आंतरिक कम्बशन इंजनों के लिए तेल अथवा पेट्रोल फिल्टर
27. आंतरिक कम्बशन इंजनों के लिए इनटेक एयर फिल्टर
28. साइकिलों अथवा मोटर वाहनों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रकार का लाइटिंग अथवा विजुअल सिग्नलिंग उपकरण
29. वाहनों के लिए हॉर्न
30. साइकिल और मोटर वाहन के लिए अन्य विजुअल अथवा साउंड सिग्नलिंग उपकरण
31. विजुअल अथवा साउंड सिग्नलिंग उपकरण, विंडस्क्रीन वाइपर, डिफ्रॉस्टर और साइकिल अथवा मोटर वाहन में इस्तेमाल होने वाले एक प्रकार के डिमिस्टर के कलपुर्जे
32. विंडस्क्रीन वाइपर, डिफ्रॉस्टर और डिमिस्टर, सील्ड बीम लैंप यूनिट, ऑटोमोबाइल के लिए अन्य लैंप
33. शीर्षक 8702, 8704 के अंतर्गत आने वाले वाहनों की कंप्लीटली बिल्ट यूनिट (सीबीयू)
34. शीर्षक 8701 से लेकर 8705 तक के मोटर वाहनों के लिए इंजन युक्त चेसिस
35. शीर्षक 8701 से लेकर 8705 तक के मोटर वाहनों के लिए बॉडी (कैब सहित)
36. घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भारत में निर्मित किए जा रहे कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ऐसे पूंजीगत सामान पर सीमा शुल्क को हटा दिया गया है जो विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

खेल-कूद के सामान के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ वस्तुओं जैसे कि फोम और पाइनवुड को एक खास सीमा तक शुल्क मुक्त आयात की अनुमति वाली वस्तुओं की सूची में शामिल कर लिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘इसी तरह चमड़ा क्षेत्र को राहत देने के लिए कच्चे चमड़े और अर्द्ध-तैयार चमड़े पर निर्यात शुल्क को तर्कसंगत किया जा रहा है।’ वित्तमंत्री ने कहा, ‘रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण और अद्यतन की तत्काल आवश्यकता है। यह राष्ट्रीय प्राथमिकता है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे रक्षा उपकरणों को मूल सीमा शुल्क से मुक्त किया जा रहा है जिन्हें भारत में अभी नहीं बनाया जा रहा है।’

जीएसटी और आगे की राह

वित्तमंत्री ने कहा कि जीएसटी को लागू करने से 17 कर और 13 उपकर अब मिलकर एक टैक्स बन गए हैं। इसके साथ ही इससे परिचालन में व्यापक बदलाव देखने को मिला है क्योंकि परिचालन के सरलीकरण से परिवहन में उपयोग किए जाने वाला ट्रक अब उतने ही समय में दो चक्कर (ट्रिप) लगाने लगा है, जबकि पहले एक ही चक्कर संभव हो पाता था। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से प्रति वर्ष लगभग 92,000 करोड़ रुपये की राहत मिली है। वित्तमंत्री ने कहा कि टैक्स रिटर्न तैयार करने के लिए निःशुल्क या फ्री लेखांकन सॉफ्टवेयर छोटे कारोबारियों को उपलब्ध कराया जा रहा है और एक पूर्णतः स्वचालित जीएसटी रिफंड मॉड्यूल को जल्द ही अमल में लाए जाने की आशा है। उन्होंने कहा कि 5 करोड़ रुपये से कम के वार्षिक कारोबार वाले करदाता को तिमाही रिटर्न भरने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयर्स विवरण को एक केन्द्रीय प्रणाली में दर्ज करना है, ताकि पहले से ही भरे हुए करदाता रिटर्न संभव हो सकें। इसके साथ ही ई-वे बिल को भी सृजित किया जाएगा। इसकी शुरुआत जनवरी, 2020 से होने की आशा है जिससे अनुपालन बोझ काफी कम हो जाएगा।

सीमा शुल्क संबंधी उल्लंघन

वित्तमंत्री ने सीमा शुल्क अधिनियम में भी कुछ संशोधन करने का प्रस्ताव रखा, ताकि फर्जी निकायों को निर्यात प्रोत्साहनों से लाभान्वित होने के लिए गैर वाजिब तौर-तरीके अपनाने से रोका जा सके। 50 लाख रुपये से ज्यादा की ड्यूटी फ्री स्क्रिप और ड्रॉ बैक सुविधा से जुड़े उल्लंानों को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध मानने के लिए सीमा शुल्क अधिनियम में प्रावधान किए जा रहे हैं। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में संशोधन के तहत तस्करी को रोकने के लिए आधार अथवा किसी अन्य पहचान पत्र के सत्यापन का प्रावधान लागू करने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए सीमा शुल्क प्राधिकरणों को सशक्त बनाने का भी प्रस्ताव है जिसने भारत से बाहर कोई अपराध किया हो।

एनबीएफसी

सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को ऐसे ब्याज की पेशकश करने की सुविधा देना का प्रावधान किया जाएगा जिस पर टैक्स उसी साल लगेगा जिस दौरान यह वास्तव में प्राप्त होगा, जैसा कि अनुसूचित बैंकों के मामले में है। इस आशय की घोषणा वित्तमंत्री ने आज अपने बजट भाषण में की।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (आईएफएससी)

15 वर्षों की अवधि के अंतर्गत 10 वर्षों के किसी भी खंड में धारा 80-एलए के तहत 100 प्रतिशत मुनाफा संबंधी कटौती सहित अनेक प्रत्यक्ष कर प्रोत्साहनों की घोषणा गिफ्ट सिटी स्थित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र के लिए की गई है। कंपनियों एवं म्युचुअल फंडों को वर्तमान एवं संचित आय पर लाभांश वितरण कर से छूट, श्रेणी-प्प्प् के वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) को पूंजीगत लाभ पर छूट और अनिवासी भारतीयों से लिए गए ऋण पर ब्याज अदायगी को भी आईएफएससी के लिए घोषित किया गया है।

सिगरेट पर उत्पाद शुल्क

वित्तमंत्री ने कहा कि तम्बाकू उत्पादों और कच्चा तम्बाकू पर राष्ट्रीय आपदा एवं आकस्मिकता शुल्क लगाया जाता है। कतिपय मामलों में इसे इस आधार पर चुनौती दी जाती है कि इन मदों पर कोई बुनियादी उत्पाद शुल्क नहीं लगाया गया है। इस समस्या का समाधान करने के लिए सांकेतिक बुनियादी उत्पाद शुल्क लगाया जा रहा है। इस तरह के बुनियादी उत्पाद शुल्क की दरों की घोषणा की गई है, जैसा कि केन्द्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की चैथी अनुसूची में उल्लिखित है।

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