Tuesday, November 12

जलती पराली और फैलता प्रदूषण

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जिंदगी दांव पर है… नेता तिकड़मबाजी में बिजी हैं, ये नहीं चलेगा- कोर्ट

लेखक- यतीन्द्र नाथ गौड़, वरिष्ठ साहित्यकार। दूरभाषः 9968900002

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर से सटे विभिन्न राज्यों के खेतों में जलाये जाने वाली पराली से दिल्ली-एनसीआर यहां तक कि उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्र दमघोटू प्रदूषण की जानलेवा चपेट में हर साल आ ही जाते हैं। इस प्रदूषित वातावरण से छुटकारा पाने के लिए आए दिन तरह-तरह के सुझाव भी सुझाये जाते हैं। किंतु ढाक के वही तीन पात वाली कहावत जस की तस बनी ही रहती है।

इस वर्ष भी जब से पराली जलानी शुरू की गई है तभी से दिल्ली सरकार, पंजाब सरकार और हरियाणा सरकार भी खासी परेशान हो रही हैं। सामान्य जनता भी तरह-तरह के सुझाव सुझा रही है। ऐसे में केंद्रीय सरकार चुप्पी साधे बैठी है! उसका ध्यान विशेष रूप से इस ओर जा ही नहीं पा रहा है। ऐसे में जानलेवा प्रदूषण से छुटकारा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को भी कारगर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही प्रभावित अन्य सरकारों को भी मार्ग दर्शन दिखलाकर अपना कर्तव्य जिम्मेदाराना तरीके से निभाने की आवश्यकता है।

इस प्रकार आब-औ-हवा गंदी होने से बचेगी और किसानों को फसल भी बढ़कर मिलने लगेगी। साथ ही दिल्ली, एनसीआर तथा उत्तर भारत में भी जहरीले धुंध और हवा से भी निजात मिल सकेगी।

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