Friday, October 18

चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी…

0
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

सीधा-सादा डाकिया जादू करे महान, एक ही थैले में भरे आंसू और मुस्कान। निदा फाजली के इस शेर से डाक विभाग के महत्व को समझा जा सकता है। फाजली जी ने जब ये शेर लिखा था उस वक्त देश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक लोगों के संदेश पहुंचाने का डाक विभाग ही एकमात्र साधन था। डाकिये के थैले में से निकलने वाली चिट्ठी किसी को खुशी का समाचार देती थी तो किसी को गम का। मगर आज नजारा पूरी तरह से बदल चुका है। इंटरनेट के बढ़ते र्पभाव ने डाक विभाग के महत्व को बहुत कम कर दिया है। आज लोगों ने हाथ से चिट्ठी लिखना छोड़ दिया है। अब ई-मेल, वाट्सएप के माध्यमों से मिनटो में लोगो में संदेशों का आदान र्पदान होने लगा है।

पहले डाक विभाग हमारे जनजीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता था। गांव में जब डाकिया डाक का थैला लेकर आता था तो बच्चे-बूढ़े सभी उसकी तरफ इस उत्सुकता से चल पड़ते थे कि उनके भी किसी परिजन की चिट्ठी आ जाये। डाकिया जब नाम लेकर एक-एक चिट्ठी बांटना शुरू करता तो सभी लोग अपनी या अपने पड़ौसी की चिट्ठी ले लेते व उसके घर जाकर उस चिट्ठी को बड़े चाव से पढ़कर सुनाते थे। उस वक्त शिक्षा का र्पसार न होने से अक्सर महिलायें अनपढ़ होती थी। इसलिये चिट्ठी लाने वालों से ही चिट्ठीयां पढ़वाती भी थीं और लिखवाती भी थी। कई बार चिट्ठी पढ़ने-लिखने वाले बच्चों को ईनाम स्वरूप कुछ पैसा या खाने को गुड़, बताशे भी मिल जाया करते थे। इसी लालच में बच्चे ज्यादा से ज्यादा चिट्ठीयां पहुंचाने का र्पयास करते थे।

उस वक्त गांवो में बैंक शाखा भी नहीं होती थी। इस कारण बाहर कमाने गये लोग अपने घर पैसा भी डाक में मनीआर्डर के द्वारा ही भेजते थे। मनीआर्डर देने डाकिया स्वयं र्पाप्तकर्ता के घर जाता था व भुगतान के वक्त एक गवाह के भी हस्ताक्षर करवाता था। इसी तरह रजिस्टर्ड पत्र देते वक्त भी र्पाप्तकर्ता के हस्ताक्षर करवाये जाते थे। डाक विभाग अतिआवश्यक संदेश को तार के माध्यम से भेजता था। तार की दर अधिक होने से उसमें संक्षिप्त व जरूरी बातें ही लिखी जाती थीं। तार भी साधारण, जरूरी होते थे। जरूरी तार की दर सामान्य से दुगुनी होती थी।

उस वक्त पत्रकारिता में भी जरूरी खबरें तार द्वारा भेजी जाती थीं जिनका भुगतान समाचार र्पाप्तकर्ता समाचार पत्रों द्वारा किया जाता था। इस बाबत समाचार पत्र का सम्पादक जिलों में कार्यरत अपने संवाददाताओं को डाक विभाग से जारी एक अधिकार पत्र देता था जिनके माध्यम से संवाददाता अपने समाचार पत्र को बिना भुगतान किये डाकघर से तार भेजने के लिये अधिकृत होता था। 15 जुलाई 2013 से सरकार ने तार सेवा को बन्द कर दिया। फोन से पहले दशकों तक दूर तक संदेश भेजने के दो ही जरिए थे चिट्ठी और तार।

आज डाक में लोगों की चिट्ठीयां तो गिनती की ही आती है। मनीआर्डर भी बन्द से ही हो गये हैं। मगर डाक से अन्य सरकारी विभागों से सम्बन्धित कागजात, बैंको व अन्य संस्थानों के र्पपत्र काफी संख्या में आने से डाक विभाग का महत्व फिर से एक बार बढ़ गया है। डाक विभाग कई दशकों तक देश के अंदर ही नहीं बल्कि एक देश से दूसरे देश तक सूचना पहुंचाने का सर्वाधिक विश्वसनीय, सुगम और सस्ता साधन रहा है लेकिन इस क्षेत्र में निजी कम्पनियों के बढ़ते दबदबे और फिर सूचना तकनीक के नये माध्यमों के र्पसार के कारण डाक विभाग की भूमिका लगातार कम होती गयी है। वैसे इसकी र्पासंगिकता पूरी दुनिया में आज भी बरकरार है। वर्तमान में डाक विभाग का एकाधिकार लगभग खत्म हो गया है। यही कारण है कि डाक विभाग दुनिया भर में अब कई नयी तकनीकी सेवाओं से जुड़ रहा है।

9 अक्तूबर को पूरी दुनिया में विश्व डाक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वर्ष 1874 में इसी दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का गठन करने के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। वर्ष 1869 में टोकियो, जापान में आयोजित सम्मेलन में विश्व डाक दिवस के रूप में इसी दिन का चयन किये जाने की घोषणा की गयी। एक जुलाई 1876 को भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बनने वाला पहला एशियाई देश था। जनसंख्या और अंतरराष्ट्रीय मेल ट्रैफिक के आधार पर भारत शुरू से ही र्पथम श्रेणी का सदस्य रहा। विश्व डाक दिवस का मकसद आम आदमी और कारोबारियों के रोजमर्रा के जीवन समेत देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक क्षेत्र के योगदान के बारे में जागरुकता पैदा करना है। दुनियाभर में र्पत्येक वर्ष 150 से ज्यादा देशों में विविध तरीकों से विश्व डाक दिवस आयोजित किया जाता है।

बदलते हुए तकनीकी दौर में दुनियाभर की डाक व्यवस्थाओं ने मौजूदा सेवाओं में सुधार करते हुए खुद को नयी तकनीकी सेवाओं के साथ जोड़ा है और डाक, पार्सल, पत्रों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक्सर्पेस सेवाएं शुरू की हैं। डाक घरों द्वारा मुहैया करायी जाने वाली वित्तीय सेवाओं को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। दुनियाभर में इस समय 55 से भी ज्यादा विभिन्न र्पकार की पोस्टल ई-सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में पोस्टल ई-सेवाओं की संख्या और अधिक बढ़ायी जायेगी। दुनियाभर में पोस्ट ऑफिस से संबंधित इन आंकड़ों से हम इसे और अधिक स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं। डाक विभाग से 82 फीसदी वैश्विक आबादी को होम डिलीवरी का फायदा मिलता है।

 भारतीय डाक विभाग पिनकोड नम्बर (पोस्टल इंडेक्स नम्बर)के आधार पर देश में डाक वितरण का कार्य करता है। पिनकोड नम्बर का र्पारम्भ 15 अगस्त 1972 को किया गया था। इसके अन्तर्गत डाक विभाग द्वारा देश को नो भौगोलिक क्षेत्रो में बांटा गया है। संख्या 1 से 8 तक भौगोलिक क्षेत्र हैं व संख्या 9 सेना की डाकसेवा को आवंटित किया गया है। पिन कोड की पहली संख्या क्षेत्र दूसरी संख्या उपक्षेत्र, तीसरी संख्या जिले को दर्शाती है। अन्तिम तीन संख्या उस जिले के विशिष्ट डाकघर को दर्शाती है। 

डाक विभाग के महत्व को बरकरार रखने के लिये केंर्द सरकार ने इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) शुरू किया है। देश के हर व्यक्ति के पास बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के क्रम में यह एक बड़ा विकल्प होगा। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने देश में 650 शाखाओं व देश भर में 3250 एक्सेस प्वाइंट में बैंकिंग सेवाएं शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में ये सेवा देश के 1.55 लाख एक्सेस प्वाइंट पर शुरू हो जाएगी। इससे देश का सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क अस्तित्व में आएगा जिसकी गांवों के स्तर तक मौजूदगी होगी।

यही नहीं इन सेवाओं के लिए पोस्ट विभाग के 11000 कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों को बैंकिंग सेवाएं देंगे। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक भारतीय डाक विभाग के अंतर्गत आने वाला एक विशेष किस्म का बैंक है जो 100 फीसद सरकारी होगा। आईपीपीबी को पूरे देश में पहुंचाने के लिए पोस्ट विभाग के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। देश भर में 40 हजार डाकिये हैं और 2-6 लाख डाक सेवक है। आने वाले वक्त में सरकार इन सभी का इस्तेमाल बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने के लिए करेगी।

Share.

Leave A Reply