Sunday, December 8

कपूरथला में जन्म, दिल्ली में निधन।

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श्रीमती शीला दीक्षित का 81 की उम्र में निधन

राहुल शर्मा
नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर को निधन हो गया। वे 81 साल की थीं। सुबह तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की सीएम रहीं, फिलहाल दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष थीं।


शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। वह 1998 से 2013 तक तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने 25 अगस्त 2014 को इस्तीफा दे दिया था। वे इस साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ीं थीं। हालांकि, उन्हें भाजपा के मनोज तिवारी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। शीला 1984 से 1989 तक कन्नोज लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। 1986-1989 तक वे केंद्रीय मंत्री भी रहीं।
दीक्षित 1984 में पहली बार बनी थीं सांसद ।

शीला दीक्षित ने पहली बार 1984 में कन्नौज सीट से चुनाव लड़ा था। यहां उन्होंने सपा के छोटे सिंह यादव को हराया था। 1984 से 1989 तक सांसद रहने के दौरान वे यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन स्टेट्स ऑफ वीमेन में भारत की प्रतिनिधि रह चुकी हैं। इसके बाद 1998 में वे नई दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं और 2013 तक इस पद पर रहीं।

आज जिस स्थिति में कांग्रेस है वहां शीला दीक्षित जैसे राजनेता पार्टी के मार्गदर्शक के साथ-साथ संगठन के विवेक के रूप में मौजूद रहे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बेहद करीब मानी जाने वाली शीला दीक्षित का विरोधियों और विपक्षी नेताओं के साथ व्यवहार भी हमेशा चर्चा में रहा।

लोकसभा से जुड़ी कुछ महत्पूर्ण खबरें
लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ समझौते को लेकर कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। शीला दीक्षित एकमात्र ऐसी नेता थी, जिन्होंने शुरू से ही अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया था कि वे अरविंद केजरीवाल से समझौता नहीं करेंगी। बाद में वही हुआ। अजय माकन और कांग्रेस के कई दूसरे नेता यह दबाव डालते रहे कि समझौता पार्टी के हित में रहेगा। राहुल गांधी ने किसी की भी नहीं सुनी और आखिर में शीला के श्एकला चलोश् की नीति पर अपनी मुहर लगा दी। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद जब एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए खड़ी करने की मुहिम शुरू हुई तो प्रदेश प्रभारी पीसी चाको और शीला में किसी बात को लेकर ठन गई। पीसी चाको ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया, आपकी तबियत खराब हैं आराम कीजिए।

मंगलवार को प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने शीला से बिना चर्चा किए तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के अधिकारों में इजाफा किया तो शीला दीक्षित को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने चाको समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव के अधिकारों में कटौती कर दी। इस घटनाक्रम के बावजूद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने शीला के खिलाफ एक शब्द तक नहीं बोला।

 

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