Sunday, September 22

ऑटोमैटिक जलशोधन एवं पुनर्चक्रण संयंत्र की एक पहल

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सुनील शर्मा

नई दिल्ली। शकूरबस्ती में कोचिंग टर्मिनल के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। कोचिंग टर्मिनल परिसर में गाड़ियों की धुलाई और पानी की व्यवस्था के लिए दो वाशिंग लाइनें शुरू की गई हैं। शकूरबस्ती में पानी की भारी कमी है। दिल्ली जल बोर्ड के पास वाशिंग लाइनों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।पानी की इस कमी को पूरा करने एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए एक बड़े जल संरक्षण संयंत्र की शुरुआत की गयी है।

 27 जून को 6 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले ऑटोमैटिक अपशिष्ट जलशोधन एवं पुनर्चक्रण संयंत्र की शुरुआत की गयी है। इससे प्रतिवर्ष 58 मिलियन गैलन पानी का अवशोधन और पुनर्चक्रण संभव होगा और इससे लगभग इतने ही ताजा जल की मांग में कमी आयेगी। ऑटोमैटिक अपशिष्ट जलशोधन एवं पुनर्चक्रण संयंत्र का निर्माण नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 2.21 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। इसमें 5 वर्ष तक इसके संचालन और इसके अनुरक्षण का कार्य भी शामिल होगा। यह संयंत्र पूरी तरह से स्वचालित है और उत्तर रेलवे पर अपनी तरह का पहला संयंत्र है। इस संयंत्र से जल पुनर्चक्रण की प्रति लीटर लागत लगभग 3 पैसा होगी। 

वाशिंग लाइन का अपशिष्ट जल, जोकि पहले सीवर लाइन में छोड़ा जाता था, अब एक नाबदान (Sump Well) में संग्रहीत करके वाशिंग लाइन परिसर पास ही के अवशोधन संयंत्र में भेजा जाता है। अवशोधन के उपरांत साफ किए गए पानी को रेलगाड़ियों की साफ-सफाई के लिए वाशिंग लाइन में भेज दिया जाता है । अवशोधित जल की परीक्षण रिपोर्ट यह दर्शाती है कि अवशोधित जल का पैरामीटर बी.आई.एस. मानकों की सुरक्षित सीमा के भीतर ही होता है।

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