Tuesday, November 12

स्वस्थ जीवन से अगर हो प्यार,  तो योग से करो सरोकार।

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न्तरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व मे पहली बार 21 जून 2015 को मनाया गया। योग पूरे विश्व मे तन, मन, को स्वस्थ बनाऐ रखने के उदेश्य से अपनाया गया है। जिसे बिमारीयों से दूर रहने मे सहायता मिली और कई बिमारीयों का ईलाज भी संम्भव हो पाया।

आजकल के यूवा वर्ग की जिंदगी बहूत ही भागती दौड़ती हो गई है। जिसमें अपने लिए वक्त निकालना असंम्भव सा होता जा रहा है। जिससे की मानसिक तनाव, चिंता और अनिन्द्रा ने जीवन को घेर लिया है। योग ही केवल एकमात्र साधन है। जिसके अपनाने से इन सभी समस्याओं को दूर किया जा सकता है और कुछ हद तक बिमारीयाॅं भी दूर रह सकती है पर हमारे यूवा वर्ग जल्द असर दिखाने वाले नूस्खों पर ज्यादा विश्वास करते हैैं, बजाये योगा के…। जहाॅं एक तरफ विदेशों मे योगा जैसी हमारी सभ्यता को अपनाया जा रहा है। वही भारत मे यूवा वर्ग विदेशी नूस्खों पर ज्यादा भरोसा करते हैं और अपनी सभ्यता से दूर होते जा रहे हैं। आवश्यता है उन्हें जागरूक करने की और योगा के प्रती रूझान बढ़ने की।
हमारी तेज़ रफ्तार भरी जिंदगी मे कहीं एक तरफ अपने खान-पान की दिन चरर्या से दूर हो गए है और फास्ट फूड पर निर्भर हो गए हैं। जिससे की कई बिमारीयां जैसे कि पेट से सम्बन्धित बिमारी मोटापा आदि परेशानी बढ़ती जा रही है। रोजा़ना योग अभ्यास से हमारी दिन चरर्या मे सन्तूलन आएगा और हमारे शरीर में पैदा हुई बिमारियों से काफी हद तक निजात मिल पायेगी। जरूरत है अपने आप को इन बाहरी चिजो़ से दूर रखने की और योग को अपने जीवन में उतारने की। अगर हम ऐसा कर लेते हैं तो कई बिमारीयों से दूर हो जायेंगे और अपने जीवन को निरोगी रख पाऐंगे। 
महिलाओं को योग प्रति जागरूक करने के लिए काफी लंबे समय मीना पंवार महिलाओं को योग की शिक्षा देते आ रही हैं। मीना पंवार ने भारत टी.वी के संवाददाता को बताया कि योग के माध्यम से मनुष्य अपने शरीर, मन एवं आत्मा में संतुलन स्थापित कर एकनिष्ठ, एकाग्र एवं स्थिर होता है और आंतरिक शक्तियों को जागृत करता है। यह केवल व्यायाम नहीं बल्कि विज्ञान भी है।
बढ़ती उम्र मे जहाॅं एक तरफ जीने की इच्छा कम और तनाव, बिमारीयां शरीर को घेर लेती हैं वहीं दूसरी तरफ योग इस उम्र मे जीने की नई तरगं और उमंग को जागृत करता है। योगा इंसान के अन्दर इस उम्र मे भी चुस्ती और फूर्ति ला देता है। जिने की नई राह का मार्ग दर्शन करता है कि स्वास्थय ही जीवन है। जिससे कि जीवन इच्छा प्रबल हो जाती हैै। बिस्तर मे पड़ा बुजूर्ग भी उठ कर चलने की हिम्मत करता है। और बरसों से रूकी अपनी जिंदगी को जिना शुरू करता हैै, और अपनी जिंदगी के आखरी पल तक एक स्वस्थ जीवन जीता हैै। पहले के ज़माने मे लोग 100 से भी अधिक उम्र तक जिया करते थे परन्तु अब उम्र सीमा घट गई है वो भी सिर्फ हमारे आलस की वजह से क्योंकि पहले के लोग अपने स्वास्थय का ज्यादा ध्यान रखा करते थे अब लोग मशीनों पर निर्भर हो गए हैै। जरूरत है अपने शरीर को स्वस्थ बनाने की जो की योगा से सम्ंभव है। तभी तो कहते है योगा ही जीवन हैै।
भारत सरकार द्वारा योग करने वाले लोगो के लिए रोज़गार के अवसर निकालने वाली है। हाल ही मे नई दिल्ली मे योग प्रमाणन बोर्ड की संचालन समिती की बैठक आयोजित की गई जिसमे आयूष मंत्रालय के सचिव रामदेव ने भाग लिया इस बैठक मे योग को करियर के तौर पर बढ़ावा देने का अहम फैसला भी लिया गया ।
1. योग स्कूल 
2. योग प्रशि़क्षण केन्द्र 
3. योग थेरपी केन्द्र
सरकार की तरफ से खोले गऐ है जहाॅं लोगांे को योग सिखाया जाऐगा और उसके फायदे भी बताऐ जाएगें। इस तरह योग शरीर के साथ-साथ अब जीवन को भी उज्जवल बनाऐगा। अब जरूरत है आगे बढ़ कर योग अपनाने की।

कविता

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