Friday, May 29

12 करोड़ लोगों पर कोरोना वायरस की मार, नौकरियां घटीं

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सुनील कुमार शर्मा
नई दिल्ली। देशभर में घोषित लॉकडाउन के चलते पिछले एक महीने से लगभग 10 से 12 करोड़ ब्लू कॉलर वर्कर्स को कोई आमदनी नहीं हो सकी है। इंडस्ट्री में इन कर्मचारियों की लगभग 70-80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह जानकारी एजेंसियों और कंपनियों ने दी है। सेक्टर पर नजर रखने वाले जानकारों ने कहा कि इस साल की आगामी तिमाहियों में नौकरियां घट सकती हैं। उन्होंने कहा कि त्यौहारी सीजन में डिमांड बढ़ने पर ही कुछ राहत मिल सकती है। ब्लू कॉलर वर्कर्स को कंपनियों के साथ जोड़ने वाली कंपनी ने कहा, ‘स्लोडाउन मार्च के मध्य से शुरू हुआ और लगभग 2-3 करोड़ लोगों के पास ही नौकरियां बची हैं।’

एक अन्य एजेंसी ने कहा कि ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, एविएशन, रिटेल और आउटडोर एंटरटेनमेंट, फूड और बेवरेज और रियल एस्टेट सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। इसके अलावा ऑटोमोटिव, गैर जरूरी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स, पोल्ट्री, डेयरी, शिपिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर भी शॉर्ट टू मीडियम टर्म में इसका असर दिखेगा। इन सेक्टरों पर लॉकडाउन का असर दिखेगा ही और हमें अब तक इनमें से किसी में भी स्थिति सुधरती नहीं दिखी है। कई फॉर्मल सेक्टर्स पर अभी पूरा असर इस वजह से नहीं दिखा है क्योंकि इनके ज्यादातर कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान भी पूरी और समय पर सैलरी मिली है।

 

उन्होंने कहा,लॉकडाउन हटने के बाद अधिक चुनौतियां आएंगी। इनफॉर्मल सेक्टर के वर्कर्स लॉकडाउन शुरू होने के बाद से बिना रोजीरोटी के गुजर-बसर कर रहे हैं। उनके लिए तो हर दिन चुनौती ही है।’ कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयीज में से अधिकतर को घंटे के हिसाब से पेमेंट मिलती है लेकिन लॉकडाउन के दौरान उनकी न के बराबर कमाई हुई है। बिजनस बंद होने के चलते ड्राइवर, डिलिवरी स्टाफ, सेल्स और बिजनस डिवेलपमेंट एंप्लॉयीज को एक से तीन महीने की तनख्वाह देकर रातोंरात नौकरी से निकाल दिया गया है।

नई उभरती कंपनियां जैसे बिजनस-टू-बिजनस ईकॉमर्स प्लैटफॉर्म उड़ान, फूड डिलिवरी ऐप स्विगी, सोशल कॉमर्स वेंचर मीशो और लॉजिस्टिक फर्म ब्लैक-बक के साथ कुछ पारंपरिक सेक्टर्स ने भी पिछले कुछ हफ्तों में कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयीज को हटाया है। ब्लू कॉलर सेगमेंट का ही हिस्सा शेयर्ड मोबिलिटी और ईकॉमर्स स्टाफ समेत गिग इकॉनमी वर्कफोर्स की आमदनी 60-70 पर्सेंट घटी है। सर्विसेज मार्केटप्लेस अर्बनक्लैप और स्विगी जैसी कंपनियों के एंप्लॉयीज ने कहा कि बिजनेस धीरे-धीरे शुरू हो रहा है, लेकिन मांग 40-50 पर्सेंट कम है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि दशहरा तक डिमांड में उछाल नहीं आने पर कर्मचारियों की संख्या या तो स्थिर रहेगी या साल के अंत तक और कम हो जाएगी।

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