Saturday, July 11

छोटे-मंदिरों के पुजारियों की अंदेखी बर्दाश्त से बाहर-शालु गोयल।

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दिल्ली सरकार को तुरंत छोटे मंदिरों के पुजारियों पर भी ध्यान दें

पूर्वी दिल्ली। आज जब पूरी दुनिया और भारत देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है तो, वही सब किसी न किसी प्रकार से सामाजिक रूप से सहायता करके एक दूसरे का योगदान कर रहे हैं। मैं तो भारत टी.वी. का बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होनें पुजारियों की दर्द भरी आवाज को उठाया है, जिसकी वजह से आज पूरे देश में इसकी आवाज उठनी भी शुरू हो चुकी है। लेकिन ऐसे समय में जो सबसे नजरअंदाज हो रहे हैं, वो हैं छोटे मंदिरों के पुजारी… अब आप चाहे दिल्ली का ही मामला लीजिए। जहां छोटे मंदिरों के पुजारी बिल्कुल ऐसे समय में आर्थिक मंदी और भुखमरी से जूझ रहे हैं। वहां उनकी ओर हमारी दिल्ली सरकार का कोई भी ध्यान नहीं हैं। मैं इस चीज को ऐसे समय में कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहती, लेकिन छोटे मंदिरों की दशा को देखते हुए मैं स्वयं शालू गोयल दिल्ली सरकार से अपील करूंगी की इस समय वह अपना ध्यान छोटे मंदिरों के पुजारी की दशा पर भी जरूर दें। क्योंकि उन्होंने दिल्ली की सभी मस्जिद और और मदरसों के मौलवियों के लिए एक सैलरी फिक्स की हुई है। जो हर महीने उन्हें मिल भी रही है। लेकिन हमारे मंदिरों के पुजारी जो हमारे द्वारा दीपदान दक्षिणा पर ही अपना जीवन यापन और अपने परिवार का पालन-पौषण कर रहे थे, वह आज कोरोना जैसी महामारी के कारण मंदिर बंद होने से आर्थिक मंदी से जूझ रहे हैं। क्योंकि आज देश के सभी मंदिर बंद है और हम लोग भगवान के दर्शन के लिए वहां नहीं जा पा रहे हैं। जिससे कि मंदिरों में दान दक्षिणा भी नहीं पा रहे और इस चीज का खामियाजा हमारे मंदिर के छोटे मंदिरों के पुजारियों को झेलना पड़ रहा है। ऐसे समय में दिल्ली सरकार (आम आदमी पार्टी) की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह छोटे मंदिर के पुजारियों की ओर भी ध्यान दें और उनकी समस्या का समाधान करें। ऐसे समय में राजनीति ना करें, वही एक सवाल मेरे मन में ये भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ उनको जिताने वाले मस्जिद और मौलवी ही थे। क्या वोट देने के भीड़ में हमारे हिन्दू पुजारी नहीं थे। दिल्ली सरकार आगे आकर ऐसे संकट की समय में इस राजनीतिक भावना से बाहर निकले और छोटे मंदिर के पुजारियों की ओर भी अपना ध्यान दें। क्योंकि हर कोई मंदिर ट्रस्ट पर निर्भर नही है। सभी ने देखा की हमारे हिंदुओं के पवित्र त्यौहार जैसे की नवरात्रे, हनुमान जयंती, भगवान परशुराम प्रकोटउत्सव अबकी बारी हमने घरों में ही मनाये, जबकि कोरोना मरीजों की संख्या भी बहुत कम थी और आज जब पूरी दिल्ली रेड जोन में बदल चुकी है तो केवल रमजान के लिए दिल्ली को खोल दिया जाता है। क्या यह चीज राजनीति से प्रेरित नहीं है, लेकिन चलिए हम इस चीज को भी दरकिनार करते हैं और उनकी मानसिकता को सलाम..। वह जो भी करें पर मैं फिर चाहूंगी कि दिल्ली सरकार को तुरंत छोटे मंदिरों के पुजारियों पर भी ध्यान दें ताकि उनकी भी परिवारों का लालन-पालन हो सके।

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