Saturday, July 11

ज्ञान साधना के स्वामी प्रज्ञानंद महाराज जी का महाप्रयाण।

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राहुल शर्मा
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय प्रज्ञा मिशन के संस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद महाराज शनिवार शाम दिल्ली स्थित आश्रम में ब्रह्मलीन हो गए। सोमवार को मध्यप्रदेश के जबलपुर में कटंगी स्थित प्रज्ञाधाम में संतो द्वारा उन्हें समाधि दी जाएगी। महाराज जी अवाना अखाड़े के महामंडलेश्वर एंव अध्यक्ष दिल्ली संत मंडल के 15 साल अध्यक्ष भी रहे। प्रज्ञाधाम मध्यपद्रेश जबलपुर के कटंगी में स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज ने अपने द्वारा स्थापित विश्व के सर्वाधिक विचार 1111 किलो के पारद शिवलिंग भी हैं।

स्वामी प्रज्ञानंद जी अभूतपूर्व ज्ञानसाधना विवेक और संकल्प के धनी थे। सर्वविदित है कि पहुंचे हुए संत प्रायःप्रवासरत रहते थे। किसी के स्थान पर रुकना उनके लिए संभव नहीं था, क्योंकि वह निरंतर यात्रा को ही अपना निष्कर्ष मानते थे। भारतीय दर्शन में साधु और जल को शतक प्रवा हरत कहां गया है। जबलपुर के निकट कटंगी में जन्म लिया और अध्यन्न करने के बाद महाविद्यालय ही प्रोफेसर, उसके बाद गायत्री मिशन से जुड़कर उन्होंने गायत्री यज्ञ को अपना लक्ष्य बनाया था। इसी अवधि में उन्होंने आत्मज्ञान, आत्मबोध और परम शक्ति के साथ ही समत्व स्थापित किया।

इनका जन्म 30 सितंबर 1945 को हुआ। महायात्री महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद जी ने साधना चेतना और धर्म की अलख जगाने और विश्व के 75 देशों में अनेकों बार भ्रमण किया। उन्होंने स्वतंत्र रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रज्ञा मिशन और अंतरराष्ट्रीय प्रज्ञा योग फाउंडेशन की भी स्थापना की। उन्होंने समस्त विश्व में राजसूय यज्ञ प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित भी किया। स्वामीजी सन 1969 में शिर्डी के साईं बाबा ने सपनें में आकर दीक्षित किया था। उनका एक सकल्प था कि कटंगी में एशिया का वृहद नेत्र अस्पताल बनाया जाये। इसके लिए उन्होंने लगभग 70 एकड़ भूमि स्वयं अपने मिशन के माध्यम से खरीदी।

लेकिन विभिन्न कारणों से यह सपना साकार नहीं हो पाया। उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि समस्त धर्म प्राण जगत उनके इस सपनें को साकार करें। सोमवार 15 जून को संतों की उपस्थिति में प्रज्ञा धाम आश्रम में ही उनकी समाधिस्थ किया जाएगा। सुप्रसिद्ध डा. आचार्य राजेश ओझा जी ने उनकी ब्रमलीन होने पर गहरा रोश व्यक्त किया है।

साथ ही भारत टी.वी के संस्थापक अनिल शर्मा जी ने भी इस दुखद समय में अपनी सची श्रद्धांजलि भी दी। दिल्ली आश्रम में श्रद्धांजलि देने पहुचें पं. सुभेष शर्मा, पंडित सुनील ओझा, आचार्य अरविंद मिश्रा, महंत नवल किशोर जी, राधेपुरी जी, अरूण अग्रवाल जी, स्वामी गणेशानंद जी, स्वामी लोकशानंद जी, स्वामी भवानी, आदि मौजूद रहे।

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