Tuesday, September 29

कुशग्रहणी (कुशोत्पाटिनी) भाद्रपद अमावस्या…

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भाद्रपद अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों के लिये कुशा एकत्रित की जाती है, इसलिए इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाता है। वहीं पौराणिक ग्रंथों में इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा गया है।

भाद्रपद अमावस्या मुहूर्त: 18 अगस्त, 2020, अमावस्या प्रारम्भः प्रातः 10ः41 बजे।
अमावस्या समाप्त: 19 अगस्त, 2020 समय प्रातः 8ः12 बजे।
कुशा एकत्रित करने का समयः प्रातः 6ः06 से 7ः42 बजे तक (19 अगस्त, 2020)
कुशोत्पाटन के नियमः कुश को उखाड़ने को कुशोत्पाटन कहा जाता है। इसके लिए स्नान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारणकर प्रातरूकाल कुशोत्पाटन के लिए प्रस्थान करें।

1. कुशोत्पाटन (कुशा को उखाड़ते) करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

2. सर्वप्रथम ‘हूं फट’ कहकर कुश का स्पर्श करें फ़िर निम्न मन्त्र बोलकर प्रार्थना करें-

कुशाग्रे वसते रुद्ररू कुश मध्ये तु केशवरू।
कुशमूले वसेद् ब्रह्मा कुशान् मे देहि मेदिनी।।

‘विरन्चिना सहोत्पन्न परमेष्ठिनिसर्जन।
नुद सर्वाणि पापानि दर्भ स्वस्तिकरो भवः’

3. इस प्रार्थना के पश्चात् हुँ फट् का उच्चारण कर कुश को उखाड़ें। कुशा उखाड़ते समय निम्न बातों का अवश्य ध्यान रखें। कुशा उखाड़ने से पूर्व यह ध्यान रखें कि जो कुश उखाड़ रहे हैं वह उपयोग करने योग्य हो। ऐसा कुश ना उखाड़ें जो गन्दे स्थान पर हो, जो जला हुआ हो, जो मार्ग में हो या जिसका अग्रभाग कटा हो, इस प्रकार का कुश ग्रहण करने योग्य नहीं होता है।

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