Saturday, August 15

पहली बार पेट्रोल से महंगा डीजल

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राहुल शर्मा
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी के बीच घरेलू बाजार में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। दिल्ली में पहली बार ऐसा हुआ है कि डीजल की कीमत पेट्रोल से अधिक हो गई है। आज लगातार 18वें दिन डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई जबकि पेट्रोल की कीमत कल के ही बराबर है। पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमत में 10.48 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है जबकि पेट्रोल भी 8.50 रुपए महंगा हुआ है। बुधवार, 24 जून को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी किए। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत तो कल के बराबर 79.76 रुपए पर टिकी रही लेकिन डीजल की कीमत 79.40 रुपए से बढ़कर 79.88 रुपए प्रति लीटर हो गई जो कल के मुकाबले 48 पैसे महंगा है।

पेट्रोल की तुलना में डीजल यूं हुआ महंगा: तेल पर लगने वाला टैक्स अप्रैल तक देश भर में सबसे कम हुआ करता था, जबकि मुंबई में ये सबसे अधिक था। जब से दिल्ली सरकार ने डीजल पर लगने वाला वैट 4 मई को 16.75 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया है, तब से दिल्ली में डीजल की कीमतें मुंबई से भी अधिक हो गई हैं। पेट्रोल पर भी वैट बढ़ाया गया, जो पहले 27 फीसदी था और अब बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया है। इसकी वजह से पेट्रोल की कीमत में 1.67 रुपए की बढ़ोतरी हुई, जबकि डीजल की कीमत 7.10 रुपये बढ़ गई।

18 दिनों में 10.48 रुपए महंगा हो गया डीजल: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूं तो पिछले 18 दिनों में से अधिकतर दिन क्रूड आयल की कीमतों में नरमी का ही रुख रहा, लेकिन घरेलू बाजार में इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अभी इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है। लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उस हिसाब से कमी नहीं हुई है। इसी का असर है कि पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमत में 10.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इतने दिनों में पेट्रोल का दाम भी 8.50 रुपये प्रति लीटर चढ़ गया।

यात्रा हो जाएगी महंगी: डीजल के दाम बढऩे से सार्वजनिक यातायात के साधन महंगे हो जाएंगे। बसों का किराया बढ़ेगा और अगर कहीं रेल इंजन डीजल से चल रहे होंगे तो उनकी भी लागत बढ़ जाएगी, तो ट्रेनों का किराया भी बढ़ाया जा सकता है। जो लोग डीजल कार से चलते हैं उनकी भी यात्रा की लागत काफी बढ़ जाएगी और महीने का ईंधन बिल बढ़ जाएगा।

बिजली की लागत में भी होगी बढ़ोतरी: अभी कारखानों, कॉरपोरेट सेक्टर में बिजली की वैकल्पिक जरूरत के लिए जरूरत के लिए सबसे बड़े स्रोत डीजल से चलने वाले बड़े-बड़े जनरेटर सेट होते हैं। इन जनरेटर्स में डीजल की खपत काफी ज्यादा होती है। डीजल की कीमत बढ़ते जाने से इनका खर्च भी बढ़ता जा रहा है। तो स्वाभाविक है कि इस तरह के संचलनात्मक खर्च बढऩे की भरपाई कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाकर ही करेंगी।

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