Friday, May 29

क्षमा करने वाला सुख की नींद सोता है-डॉ. आचार्य राजेश ओझा

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शनिदेव का जन्मोत्सव 22 मई 2020 को मनाया जाएगा

न्याय के देवता और दंडाधिकारी सूर्य देव माता छाया के पुत्र शनिदेव का जन्मोत्सव ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या के 22 मई 2020 को मनाया जाएगा इस बार अमावस्या तिथि का शुभारंभ 21 मई 2020 रात्रि 9ः21 से होगा तथा उदय तिथि 22 मई 2020 को अमावस्या रात्रि 11ः08 तक रहेगी इसलिए शनि अमावस्या 22 मई 2020 को मनाया जाएगा शनि देव तुला राशि के उच्च एवं मेष राशि में नीच के हो जाते हैं।

शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं शनिदेव का रंग काला शनि देव जी की दिशा पश्चिम है ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को क्रूर ग्रह माना गया है शनि देव कुंडली के जिस भाव में बैठते हैं उसे वफा देते हैं और जिस भाव पर दृष्टि डालते हैं उस भाव को कमजोर कर देते हैं 21 मई 2020 मकर राशि में वक्री होने से विकार बीमारी बढ़ेगी और आम जनों को पीड़ा का सामना करना पड़ेगा 29 सितंबर 2020 को शनि मार्गी हो जाएंगे गति से चलते हैं इसलिए न्याय मिलने में भी धीमी गति रहती है शनि के प्रभाव से मनुष्य विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित रहता है पक्षाघात, मिर्गी बार-बार, सर्दी होना, हड्डियों में दर्द रहना, वाद पित्त आदि होता है वैसे तो हर वक्त शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करते हैं लेकिन शनि जयंती पर कर्मफल दाता शनि देव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है पूजा करने के पश्चात् काला कपड़ा काली दाल उड़द लोहे की वस्तु आदि दान करना चाहिए शनि देव की उपासना से अनेकों कष्टों से मुक्ति मिलती है।

शनिदेव की पूजा करने से जवाब लाभान्वित होते हैं तेल और मूंगफली का तेल, काली मिर्च, अचार, लोंग, काला नमक आदि प्रयोग से शनि महाराज प्रसन्न होते हैं यदि तिल के तेल का दान किया जाए शीघ्र लाभ होता है शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों को हमेशा डर रहता है निर्धनता, बीमारी व अन्य तरह की परेशानियां होती हैं उन्हें शनि देव जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दंडाधिकारी शनि की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार का कष्ट दूर होता है इस बार यदि शनि जयंती पर आप शनि देव की उपासना करते हैं तो आप अनेकों कष्टों से व्यापार स्वास पारिवारिक से आपको निजात मिलेगा शनि देवता के प्रमुख ग्रहों में माने जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में बहुत अधिक ही महत्व मिला है शनि देव के दृष्टि मान से राजा को रंक बना सकते हैं शनिदेव से पीड़ित व्यक्ति को लोहे का छल्ला नीलम आदि धारण नहीं करना चाहिए नहीं तो पीड़ा अधिक बढ जाती है शनि देव की उपासना करते समय या तेल चढ़ाते समय उनके नेत्रों में नहीं देखना चाहिए सामने से खड़े होकर तेल ना चढ़ाएं इस प्रकार शनि की उपासना करने से हम अनेकों व्याधियों से निजात प्राप्त होता है।

-डॉ. आचार्य राजेश ओझा
गवर्नर, अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद

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