Wednesday, April 1

‘थाली-ताली’ बजाने के हैं कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण-नरेन्द्र मोदी।

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जनता कर्फ्यू  के दौरान सायं 5 बजे सभी एक साथ बजाएंगे घंटा, शंख व थाली।

अनिल कुमार शर्मा
दिल्ली। भारतीय सनातन धर्म और आयुर्वेद की माने तो वातावरण में ध्वनि पैदा करना न सिर्फ व्यक्ति के आसपास के वातावरण को बल्कि व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक शक्ति को बनाता है मजबूत। कोेरोना वायरस से सतर्क रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 मार्च को देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से कोरोना के बचाव और जागरूकता फैलाने के लिए सहयोग मांगा। साथ ही प्रधानमंत्री ने रविवार को जनता कर्यू का पालन करने का अनुरोध भी किया। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू में सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक लोगों को घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। वहीं जनता की ओर से फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर जैसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर संदेश जारी कर लोगों से अपील की जा रही है कि वह इसे सफल बनाएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी पीएम मोदी की इस अपील की सराहना की है, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को इसमें भी साजिश की बू आ रही है और इसका विरोध करने का ऐलान किया है। चारा घोटाले के चार मामलों में सजायाता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले विधायक भोला यादव ने दरभंगा में प्रेस कांफ्रेंस कर जनता कर्यू को अघोषित आपातकाल बताते हुए विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस को रोकने में सरकार फेल है। इस महामारी से बचाव और उबारने की कोई तैयारी नहीं है। इसलिए लोगों के ध्यान को भटकाने के लिए जनता कर्फ्यू  का ऐलान किया गया।
इस बीच पीएम मोदी ने लोगों से ये भी कहा कि वो 22 मार्च के दिन अपने-अपने घरों में से ही ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी बजाकर, शंख बजाकर एक-दूसरे का आभार जताएं और इस कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एकजुटता दिखाएं। पीएम मोदी की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर ‘थाली-ताली’ बजाना आलोचना का कारण बना तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इसकी जमकर तारीफ भी की। इस बारे में कुछ का कहना था कि ये दरिद्रता की निशानी है और पीएम सुविधाओं को बढ़ाने की बजाय ढोंग करवा रहे हैं जबकि कुछ ने इसे ध्वनि पैदा कर बीमारी को भगाने का आयुर्वेदिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कारण बताया है। इन सबके बीच लोग असमंजस में है कि सही क्या है, तो आइए इस बारे में हम आपको वैज्ञानिक कारण बताते हैं।
भारतीय सनातन धर्म और आयुर्वेद की माने तो वातावरण में ध्वनि पैदा करना न सिर्फ व्यक्ति के आसपास के वातावरण को बल्कि व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक शक्ति को मजबूत बनाता है। ये ध्वनि शंख बजाकर, थाली बजाकर या घंटी बजा कर पैदा की जा सकती है। आयुर्वेद की मानें तो घंटियां इस तरह से बनाई जाती हैं कि जब वे ध्वनि पैदा करती हैं तो वो व्यक्ति के दिमाग के बाएं और दाएं हिस्से में एकाग्रता पैदा करती हैं जो मानव शरीर के सभी सात उपचार केंद्रों को सक्रिय कर देता है।
जब भी घंटियां बजाई जाती है तब वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो काफी दूर तक जाता है। इस कंपन के कारण ही इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। इसी तरह शंख, घंटी, थाली और चम्मच बजाने से निकलने वाली ध्वनि एक निश्चित आवृत्ति में तेज कंपन ध्वनी पैदा करती हैं, जो कई व्यक्तियों के शारीरिक रूप से अलग-अलग होने के बाद भी एक बराबर हो जाती है। यही ऊर्जा शरीर में किसी भी रोग और विषाणुओं से लड़ने की क्षमता पैदा करती है।
विज्ञान हमेशा से ठोस तथ्य की तलाश में रहा है। ध्वनी पैदा करने की इस पद्धति में भी विज्ञान ने शोध कार्य और परीक्षणों का सहारा लिया। नासा के माने तो ध्वनी पैदा करने से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो जीवाणु का नाश कर लोगों में ऊर्जा व शक्ति का संचार करता है। इसमें शंख बजाने को खासा महत्व दिया गया है क्योंकि शंख बजाने से आतंरिक और बाहरी दोनों वातावरण प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है। कई टेस्ट से इस तरह के नतीजे सामने आए हैं। इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख के प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधित होती हैं। शंख-ध्वनि से वातावरण साफ होता है। शंख की आवाज जहां तक जाती हैं वहां तक सभी हानिकारक कीटाणुओं का नाश हो जाता है।
पूरी दुनिया कोरोना वायरस के फैलते जाने से चिंतित है और कई स्तरों पर इसकी रोकथाम के लिए कोशिशें जारी हैं। अधिकतर देशों में इस विषाणु ने बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित किया है और आज एक भयावह आपदा की स्थिति पैदा हो चुकी है. भारत ने इस समस्या के प्रभाव व प्रसार से दक्षिणी एशिया के देशों को बचाने की दिशा में सराहनीय पहल की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विस्तार से भारत में कोरोना को रोकने के लिए हो रही कोशिशों की जानकारी सदस्य देशों को दी है, जिनमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी है। बहरहाल, इस संबंध में अन्य देशों की ओर से बहुत कुछ नहीं कहा गया है और यह आगामी दिनों में ही पता चल सकेगा कि इस दिशा में क्या प्रगति हो रही है। ऐसा विभिन्न तकनीकी सहयोगों के बारे में भी कहा जा सकता है। कोरोना वायरस की रोकथाम की कोशिशों के भारत के अनुभवों से अन्य सदस्य देश फायदा उठाना चाहते हैं और जानकारी साझा करना चाहते हैं, इसके लिए भी हमें कुछ दिन इंतजार करना चाहिए।

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