Saturday, July 11

मत मनो वास्तु को

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‘‘हमारे शरीर की ऊर्जा उस स्थान से संचालित होती है जहां पर हम रहते हैं, यदि हम केवल उस स्थान के तत्वों को ही संतुलित कर लेते हैं तो काफी हद तक हम अनेक बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन आज के समय में खासकर शहरों में कम स्पेस होने के कारण घरों का निर्माण वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार नहीं हो पाता है जिसके कारण वहां पर रहने वाले व्यक्ति अनजाने में ही कई गंभीर रोगों का शिकार हो जाते हैं।

मानव शरीर पांच तत्वों से बना होता है। पृथ्वीए आकाशए वायुए जल और अग्निए इन्हें पंच महाभूत या पंच तत्व भी कहा जाता है। इन पांच तत्वों का उल्लेख हमारे वेदों में तो आदि काल से है हीए लेकिन अब पश्चिमी विद्वानों ने भी सेहत के लिए इनके महत्व को स्वीकार किया है।

इन सभी परेशानियों से बचने के लिए वास्तु शास्त्र के कुछ नियमों को जरूर अपनाएं:

  • मुख्य द्वारः पूर्व-उत्तर दिशा सूर्याेदय की दिशा होने की वजह से इस तरफ से सकारात्मक ऊर्जा से भरी किरणें हमारे घर में प्रवेश करती हैं। घर में रहने वाले सभी व्यक्तियों की सुख शांति के लिए घर का मुख्य दरवाज़ा और खिड़की-दरवाजे पूर्व या उत्तर दिशा में होना शुभ माना जाता है।
  • भूमिगत जल स्रोतः नल, ट्यूबवेल आदि के लिए उत्तर पूर्व दिशा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
  • पूजा घरः उत्तर-पूर्व दिशा घर की पवित्र दिशा मानी जाती है इसीलिए यहां पूजा करना सर्वाेत्तम माना गया है , घर के पूजा घर में कभी भी मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी चाहिए। घर के पूजा स्थान में कागज, मिट्टी की मूर्ति ही सर्वाेत्तम मानी गई हैं, अगर घर में धातु की मूर्ति है तो उसका प्रतिदिन पंचोपचार पूजा करना अति आवश्यक है। पूजा घर शौचालय से सटा हुआ नहीं होना चाहिए।
  • रसोई घरः क्योंकि दक्षिण पूर्व ऊर्जा का स्थान है इसलिए दक्षिण-पूर्वी दिशा रसोईघर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा में रसोईघर का स्थान होने से परिवार के सदस्यों सेहत अच्छी रहती है। यह ‘अग्नि’ की दिशा है इसलिए इसे आग्नेय दिशा भी कहते हैं।
  • स्टडी रूमः वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम के मध्य में अध्ययन कक्ष बनाना शुभ होता है। स्टडी टेबल दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर ऐसे रखे कि पढ़ाई करते समय बच्चे का मुख हमेशा उत्तर पूर्व और पूर्व की ओर हो।
  • शयनकक्षः शयन कक्ष के लिए मकान की दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम सर्वाेत्तम होती है। ध्यान रहे कि शयनकक्ष में बेड के ठीक सामने आईना ना हो। शयन कक्ष में बेड पर सोते समय पैर हमेशा उत्तर या पश्चिम की ओर होने चाहिए।
  • अतिथि कक्षः उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम दिशा मेहमानों के लिए अति उत्तम मानी गी है। अतिथि कक्ष को कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए।
  • शौचालयः शौचालय भवन के नैऋत्य यानि दक्षिण -पश्चिम में या फिर दक्षिण पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है।
  • सेप्टिक टैंकः सेप्टिक टैंक की सही दिशा वायव्य कोण है । सेप्टिक टैंक भूल कर भी दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए।

नोटः उत्तर पूर्व दिशा हमारे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तीनों आयामों को पूर्णतया संचालित करती है, इसलिए वास्तु शास्त्र में इस दिशा का महत्वपूर्ण स्थान है मकान बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हमेशा मकान का ढलान उत्तर पूरब की ओर ही हो और इस दिशा में भूलकर भी टॉयलेट नहीं बनायें। घर परिवार की सुख समृद्धि के लिए इस दिशा को हमेशा साफ- स्वच्छ रखना चाहिए।

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