Saturday, July 11

विटामिन डी की कमी से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां

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क्या आप जानते हैं विटामिन डी की कमी से आर्थराइटिस (जोड़ों की बिमारी) हो सकती है। आम तौर पर किसी का भी ध्यान विटामिन डी की ओर नहीं जाता और बिमारी बढ़ती रहती है। आज की आधुनिक जीवन शैली से ही भी यह बिमारी बढ़ रही है। आजकल घरों और दफ्तरों में शीशे का जमकर उपयोग हो रहा है पर ये आपकी हड्डियों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। ऐसे घर और दफ्तर न केवल ताजा हवा, बल्कि धूप भी नहीं आने देते जिस कारण शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है। इससे हड्डियां कमजोर होती हैं। देश के अलग-अलग शहरों में जोड़ों में दर्द एवं गठिया (अर्थराइटिस) के एक हजार मरीजों पर हुए अध्ययन में पाया गया है कि ऐसे मरीजों में से 95 प्रतिशत मरीजों में विटामिन-डी की कमी होती है और इसका एक मुख्य कारण पर्याप्त मात्रा में धूप न मिलना है, जो विटामिन-डी का मुख्य स्रोत है।

जब भी किसी को घुटने या जोड़ में दर्द होता है, तो उसे लगता है कि कैल्शियम की कमी हो गई है, जबकि विटामिन-डी की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। अगर कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन-डी की भी समय पर जांच करवा ली जाए तो आर्थराइटिस को बढ़ने से रोका जा सकता है।

इसके अलावा बचपन में खानपान की गलत आदतों व कैल्शियम की कमी के कारण आर्थराइटिस के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस की भी संभावना बहुत अधिक होती है। ऑस्टियोपोरोसिस में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों का घनत्व एवं अस्थि मज्जा बहुत कम हो जाता है। साथ ही हड्डियों की बनावट भी खराब हो जाती है, जिससे हड्डियां अत्यंत भुरभुरी और अति संवेदनशील हो जाती हैं। इस कारण हड्डियों पर हल्का दबाव पड़ने या हल्की चोट लगने पर भी वे टूट जाती हैं।

सबसे ज्यादा चिंता की बात है कि वर्तमान पीढ़ी कम कैल्शियम वाला आहार और विटामिन-डी की अपर्याप्त मात्रा ले रही है, जिससे उनमें हड्डियों का घनत्व कम और हड्डियां कमजोर हो रही हैं। प्रतिदिन केवल एक पेय पदार्थ जैसे कोला पीने वाली महिलाओं की तुलना में प्रतिदिन तीन कोला पीने वाली महिलाओं के कूल्हे की हड्डियों का घनत्व 2. 3 से 5.1 प्रतिशत तक कम पाया गया है। बड़ी उम्र में होने वाले इस रोग से बचपन में ही बचाव किया जा सकता है। अगर बच्चों को खासकर किशोरावस्था में प्रतिदिन 1200 से 1300 मिलीग्राम कैल्शियम दिया जाए तो वे इस बीमारी से बच सकते हैं।

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