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देश के कई हिस्सों में अंडे के दाम करीब 35 से 40 फीसदी तक बढ़े

नई दिल्ली। अंडा खाने के शौकीन लोगों को पिछले एक साल में बढ़ती कीमतों ने परेशान किया है। देश के कई हिस्सों में अंडे के दाम करीब 35 से 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। पोल्ट्री फार्म से निकलने वाला एक अंडा करीब सात रुपए का है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत साढ़े आठ से नौ रुपए तक पहुंच गई है। अंडे की बढ़ती कीमतों के पीछे मक्के की महंगाई एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है और इसका संबंध सरकार के एथेनॉल मिश्रण अभियान से जुड़ रहा है।

पोल्ट्री उद्योग में मुर्गियों के चारे पर उत्पादन लागत का करीब 65 से 70 फीसदी हिस्सा खर्च होता है। इस चारे में मक्का प्रमुख सामग्री है। ऐसे में मक्के की कीमत बढ़ते ही पोल्ट्री फीड महंगा हो जाता है और इसका सीधा असर अंडे और चिकन की कीमतों पर पड़ता है। करीब तीन साल पहले मक्का करीब 1400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा था, जो अब बढ़कर करीब 2,650 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। पिछले पांच महीनों में ही इसके भाव में करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मक्का महंगा होने की प्रमुख वजहों में एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के अभियान के तहत अब मक्का भी एथेनॉल उत्पादन का अहम कच्चा माल बन गया है। संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार देश में सालाना करीब 4.34 करोड़ टन मक्के का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 37 फीसदी हिस्सा एथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल हो रहा है। दूसरी ओर पोल्ट्री उद्योग भी मक्के का बड़ा उपभोक्ता है। ऐसे में एथेनॉल और पोल्ट्री, दोनों क्षेत्रों की बढ़ती मांग के कारण घरेलू बाजार में मक्के की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

अंडे की महंगाई के लिए केवल एथेनॉल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। गर्मी का असर, मौसम की प्रतिकूलता, मुर्गियों में बीमारियां, सोयाबीन और अन्य चारा सामग्री की बढ़ती कीमतें भी उत्पादन लागत बढ़ाती हैं। मांग और आपूर्ति की स्थिति भी अंडे के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाती है। मक्के की बढ़ती घरेलू खपत के कारण भारत को अब आयात का सहारा भी लेना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने रिकॉर्ड करीब 10 लाख टन मक्का आयात किया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मक्का उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं बढ़ा, तो आने वाले समय में अंडे की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।


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