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दिल्ली के कॉलेज और यूनिवर्सिटी ने खेल-खेल में किया सर्वे, स्टूडेंट्स ने बताई सच्चाई

नई दिल्ली। दिल्ली के अलग-अलग कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसा अनोखा सर्वे किया है, जिसे बड़ी से बड़ी संस्था भी नहीं कर सकीं। बता दें कई यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट्स ने बचपन नाम की संस्था के साथ मिलकर दिल्ली के अलग-अलग मेट्रो स्टेशन पर कैंप लगाए, जिसमें कई अलग-अलग खेल रखे, जिसमें उन्होंने कई डिस्पोजल ग्लास पर लिखा ‘यौन शोषण के शिकार के मामले में जिसके साथ हुआ है, वही दोषी है’३क्या पीरियड्स में लड़कियों को दर्द होता है और इसके साथ ही लिखा कि क्या आपके साथ बचपन में कोई यौन शोषण हुआ है और जिसने किया क्या वह कोई परिचित था या नहीं।

ऐसे कई सवाल लिखकर उन्होंने स्टूडेंट्स के सामने रखें। स्टूडेंट्स ने खेल खेल में उन ग्लास को उठाया और अपनी सच्चाई बताई। कई केस ऐसे सामने आए, जिसमें स्टूडेंट्स ने बताया कि बचपन में लड़के और लड़कियों दोनों के साथ यौन शोषण हुआ है। लड़कियां बदनामी के डर से नहीं बता पाईं, जबकि लड़के शर्म की वजह से नहीं बता सके। बचपन इंडिया संस्था और एमिटी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट जिन्होंने दुर्गाबाई देशमुख मेट्रो स्टेशन पर यह कैंप लगाया था उनसे खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस दौरान कई लड़कों ने भी इस खेल में शामिल होकर यह बताया कि उन्हें लगता था कि लड़कियों को पीरियड्स में दर्द नहीं होता है। इस सर्वे में जिस तरह से उनकी काउंसलिंग की गई तो अब उन्हें समझ में आया कि हां पीरियड्स में होने वाला दर्द सच में बहुत ज्यादा होता है, जिसे समझ पाना लड़कों की बस की बात नहीं है। इसके अलावा लड़कों ने यह भी माना कि बचपन में कहीं ना कहीं उनके साथ उनके जानने वालों ने ही यौन शोषण किया है। हालांकि ऐसे लड़कों की संख्या कम थी, जिन्होंने इस मामले पर खुलकर बात की।

दिल्ली के अलग-अलग मेट्रो स्टेशन पर यह कैंप लगे गए। उन्होंने अपना कैंप दुर्गाबाई देशमुख पर लगाया है, जिसमें करीब 7 स्टूडेंट उनके साथ अलग-अलग यूनिवर्सिटी और कॉलेज के शामिल हैं। यहां पर सबसे ज्यादा स्टूडेंट आते हैं। इसीलिए यहां पर हर एक स्टूडेंट से बातचीत की गई और उनको इसका हिस्सा बनाया गया। इसमें ज्यादातर लड़कियों ने आकर बताया कि उनके साथ कहीं ना कहीं यौन शोषण हुआ है, लेकिन डर की वजह से वो किसी को नहीं बता पाईं।

रिपोर्ट के मुताबिक जब स्टूडेंट्स अपने दर्द को यहां पर बता रहे हैं तो उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि आखिर इस तरह के मामले में किस तरह से वो एक्शन ले सकते हैं। उन्हें अपने माता-पिता को यह बात बतानी चाहिए और जब भी ऐसा कुछ हो तो उन्हें पुलिस या प्रशासन का सहारा लेना चाहिए। हमेशा ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए। स्टूडेंट के ग्रुप ने अपना दर्द साझा करने वाले स्टूडेंट्स को बचपन इंडिया संस्था की इंस्टाग्राम से लेकर के हर तरह की हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराए ताकि जब भी उनके साथ दोबारा ऐसा हो तो वो यहां पर कॉल करके जानकारी दे सकें।


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