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हिमाचल के काकती गांव में है मात्र 6 लोगों की आबादी

शिमला । हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित काकती गांव अपनी बेहद कम आबादी के कारण खास है। इस गांव की कुल आबादी मात्र छह है। इतना ही नहीं, यहां एक ही पुश्तैनी घर में परिवार की कई पीढ़ियां रहती आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ी टीले पर बसा यह गांव काजा से करीब 10 किलोमीटर दूर है। काकती गांव की पहचान यहां मौजूद पारंपरिक मिट्टी के घर और सादगी भरी जीवनशैली से जुड़ी है। परिवार की कई पीढ़ियां इसी पुश्तैनी घर में रह रही हैं। परिवार के छोटे भाई कलजंग टाकपा लामा बौद्ध भिक्षु हैं और काजा स्थित एक बौद्ध गोंपा में सेवाएं देते हैं। वहीं, बड़े भाई छेरिंग नामगयल अपनी पत्नी रिंगजिन यूडन के साथ गांव में रहते हैं। छेरिंग के बड़े बेटे सोनम छोपेल भी लामा हैं और कांगड़ा तथा मंडी जिले की सीमा के पास चौंतड़ा स्थित बौद्ध मंदिर में शिक्षा ले रहे हैं। 

उनके दूसरे बेटे नवांग ज्ञालसन विशेष जरूरतों वाले व्यक्ति हैं, जबकि तीसरे बेटे नवांग कुंगा टैक्सी चलाकर आजीविका कमाते हैं। परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन से भी जुड़ा हुआ है। करीब 15 बीघा जमीन पर खेती करके वे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। काकती गांव की एक बड़ी पहचान इसका पारंपरिक मिट्टी और पत्थरों से बना घर है। रिपोर्ट में इस घर की उम्र करीब 300 साल बताई गई है, जबकि परिवार के रहने वाले घर को लगभग 100 साल पुराना भी बताया गया है। इस अंतर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक घर स्थानीय मौसम के अनुकूल बनाए जाते थे। मोटी मिट्टी की दीवारें सर्दियों में गर्माहट बनाए रखने और गर्मियों में घर को अपेक्षाकृत ठंडा रखने में मदद करती हैं। 

स्पीति घाटी में सर्दियां बेहद कठोर होती हैं। भारी बर्फबारी और जमा देने वाली ठंड के कारण कई बार रास्ते बंद हो जाते हैं और आसपास के इलाकों से संपर्क मुश्किल हो जाता है। ऐसे में परिवार को सर्दियों से पहले कई महीनों का राशन, दवाइयां, ईंधन और पशुओं के चारे का इंतजाम करना पड़ता है। यहां सर्दियों में जीवन चलाने के लिए पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है। काकती गांव तक सुविधाएं भी धीरे-धीरे पहुंचीं। वर्ष 2008 में यह सड़क से जुड़ा और 2011 में बिजली पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 में यहां बीएसएनएल की 4जी मोबाइल सेवा भी शुरू हुई। इससे गांव के लोगों के लिए बाहरी दुनिया से संपर्क करना आसान हुआ है। गांव से काजा सड़क मार्ग से करीब 10 किलोमीटर दूर है। बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए लोगों को काजा जाना पड़ता है। सर्दियों में बर्फबारी के कारण यह दूरी तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 


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