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ई-टिकटिंग में फर्जी बुकिंग

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने 2025 में ई-टिकटिंग प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी बंद कर दी हैं। दिसंबर तक के पिछले छह महीनों में 60.43 अरब फर्जी बुकिंग प्रयास रोके गए। इससे असली यात्रियों को पहले आधे घंटे में टिकट आसानी से मिलना शुरू हुआ। पहले दलाल आधे घंटे में सारी बुकिंग कर लेते थे, जिससे आम यात्रियों को समस्या होती थी। रेलवे ने बुकिंग प्रणाली में आधार लिंकिंग और ओटीपी को अनिवार्य किया है। बुकिंग शुरू करने से पहले आधार नंबर डालना होता है और लिंक्ड मोबाइल पर ओटीपी आता है। केवल सही ओटीपी डालने पर बुकिंग प्रोसेस आगे बढ़ता है। इससे एक व्यक्ति के 10 , 20 फर्जी अकाउंट बनाना लगभग असंभव हो गया।

जुलाई 2025 से यह सिस्टम कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण लगा चुका है। ई-टिकटिंग वेबसाइट पर कई स्तरों पर कैपटेक लगाया गया है, जिसे कंप्यूटर प्रोग्राम क्रैक नहीं कर सकते। अकामाई एंटी-बॉट टूल फर्जी ट्रैफिक तुरंत पकड़ता है।

वेबसाइट तेज लोड के लिए सीडीएन का इस्तेमाल है। साथ ही नेटवर्क फायरवॉल, आईपीएस और डब्ल्यूएफ 24 गुघ्णित 7 सतर्क हैं। आईएसपी स्तर पर 30 जीबीपीएस डीडीओएस मिटिगेशन मौजूद है। रेलटेल डार्क वेब स्कैनिंग करता है। चाणक्यपुरी डेटा सेंटर सीसीटीवी और आईएसओ 27001 सर्टिफाइड है। सीईआरटी-इन 24/7 निगरानी रखता है और नियमित ऑडिट करता है। शक के आधार पर 12,819 ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए और 3.99 लाख फर्जी बुकिंग पकड़ी गईं।

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