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खाड़ी में तनाव कम हुआ, आपकी जेब को मिलेगी राहत

नई दिल्ली। जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति ने खाड़ी देशों में तनाव बढ़ाया था, तब इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ा था। कच्चे तेल, गैस और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के चलते पेट्रोल-डीजल से लेकर दूध और हवाई टिकट तक सब कुछ महंगा हो गया था। लेकिन अब जैसे-जैसे यह भू-राजनीतिक संकट खत्म हो रहा है, भारत में महंगाई पर लगाम लगने और कई आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं के दाम घटने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खाड़ी में शांति का सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा।

भारत अपनी 60 फीसदी एलपीजी और 50 फीसदी प्राकृतिक गैस (एलएनजी) इन्हीं देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रोपेन-ब्यूटेन और स्पॉट एलएनजी की कीमतें गिरने से घरेलू एलपीजी सिलेंडर 70 से 100 रुपये तक और सीएनजी-पीएनजी 4 से 6 रुपये प्रति किलो तक सस्ते हो सकते हैं। हालांकि, एलपीजी पर सरकार सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है या नहीं, यह देखना होगा। इसके अलावा हवाई सफर भी सस्ता होगा। कच्चे तेल की कीमतें सामान्य होने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) 10-12 फीसदी सस्ता होगा, जिससे एयरलाइंस कंपनियां हवाई किराए में 8-10 फीसदी की कटौती कर सकती हैं। आपकी रसोई में पहुंचने वाले विदेशी खजूर और अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स भी 25 से 30 फीसदी तक सस्ते होंगे, क्योंकि समुद्री नाकेबंदी खत्म होने से इनकी सप्लाई सामान्य होगी। कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरक (यूरिया, फॉस्फेटिक खाद) के आयात पर लगने वाली लागत 12-15 फीसदी तक कम होगी, जिससे किसानों को राहत मिलेगी। उद्योगों के लिए प्लास्टिक दाना, स्क्रैप मेटल, इंडस्ट्रियल सल्फर और पेंट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी सस्ता हो जाएगा।

युद्ध के दौरान समुद्री जहाजों का भाड़ा और वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम 300 फीसदी तक बढ़ गया था, जो अब 30 फीसदी कम होने का अनुमान है। इससे इन उत्पादों की इनपुट लागत घटेगी और वे उपभोक्ताओं के लिए सस्ते हो जाएंगे। अंत में, ईंधन की लागत कम होने से ऑनलाइन डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे डिलीवरी चार्जेस में 5-8 फीसदी की राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, खाड़ी में शांति भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई से एक बड़ी राहत बनकर आई है।

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