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मेरा सीजेपी से कोई संबंध नहीं-धुव्र राठी

नई दिल्ली। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से अपना कोई रिश्ता होने से इनकार किया है, जबकि वह देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उसके आंदोलन में शामिल हुए। विदेश में रहकर भारतीय राजनीति और सरकार की आलोचना के लिए जाने जाने वाले राठी ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर इस प्रदर्शन में शामिल होने आए थे, उनका सीजेपी से किसी तरह का जुड़ाव नहीं है।

यूट्यूब पर करीब 40 मिलियन सब्सक्राइबर्स वाले ध्रुव राठी को सीजेपी नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास का दोस्त बताया जाता है। नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के पहले आंदोलन के दौरान भी वह अक्सर अभिजीत दीपके के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत करते हुए दिखते थे। अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में उन्होंने खुद भी शामिल होने का फैसला किया। बेंगलुरु में 8 अक्टूबर को आयोजित प्रदर्शन से ठीक पहले भारत आए ध्रुव राठी ने उस दिन मंच से भाषण भी दिया और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए वोट चोरी के आरोप लगाए। राठी 10 अक्टूबर को सीजेपी की ओर से दिल्ली में घोषित प्रदर्शन में भी हिस्सा लेना चाहते थे। वह इसके लिए दिल्ली पहुंच भी गए थे। शुक्रवार शाम वह इंडिया गेट गए और वहां से एक वीडियो बनाकर प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने की अपील की।

10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके को सुबह ही उनके गुरुग्राम स्थित घर से हिरासत में ले लिया गया। उसी दिन ध्रुव राठी को भी दिल्ली में हिरासत में ले लिया गया। 20 से अधिक घंटे तक हिरासत में रहने के बाद छोड़े गए ध्रुव राठी ने बाद में आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें घसीटकर बेडरूम से ले गई और इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं। ध्रुव राठी भले ही पहले धर्मेंद्र प्रधान और अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर सीजेपी के साथ खड़े दिख रहे हैं, लेकिन उन्होंने सीजेपी से किसी तरह के जुड़ाव या रिश्ते से इनकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सीजेपी में कोई पद नहीं रखते हैं। राठी ने अपनी भूमिका साफ करते हुए कहा, मैं यहां व्यक्तिगत तौर पर आया हूं। मैं ऐसा नहीं कि सीजेपी से कोई जुड़ा हूं या कुछ (पदाधिकारी) हूं। मैं व्यक्तिगत क्षमता से आया हूं, जैसे देश में लाखों लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं, उन्हीं की तरह। राठी ने कहा कि वह खासतौर पर इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए ही भारत आए हैं। राठी ने कहा, इलेक्शन कमीशन न्यूट्रल होना चाहिए। वोट चोरी बहुत गंभीर मुद्दा है, इसके बिना लोकतंत्र का अस्तित्व नहीं हो सकता है। अगर वोट इस तरह चुराए जा रहे तो यह लोकतांत्रिक देश नहीं है। यह डिक्टेटरशिप की ओर बहुत ज्यादा नीचे गिर चुका है। मैंने हमेशा कहा है कि यह स्पेक्ट्रम है। यह मत कहो कि 100 पर्सेंट डिक्टेटरशिप है या 100 पर्सेंट डेमोक्रेसी है। 2014 में हम जहां थे वहां से (डिक्टेटरशिप के) बहुत करीब आते जा रहे हैं।

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