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महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में टूट की खबरों से मचा घमासान

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर जारी है।

सूत्रों के अनुसार, बागी रुख अपनाने वाले सांसदों की नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह बैठक सांसद श्रीकांत शिंदे के सरकारी आवास पर आयोजित की जा सकती है। बैठक में आगे की रणनीति और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा होने की संभावना है। यह भी माना जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। यदि ये सांसद शिंदे गुट का दामन थामते हैं तो लोकसभा में शिवसेना की संख्या बढ़कर 13 तक पहुंच सकती है। वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का आंकड़ा भी और मजबूत हो जाएगा। इस संभावित घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है। राउत ने कहा कि उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं की ताकत पर खड़ी है और केवल सांसदों या विधायकों के आने-जाने से संगठन कमजोर नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनकी पार्टी का समय आएगा तो वह भी दिखाएगी कि राजनीतिक दलों में टूट कैसे होती है। उनके इस बयान को मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों के पाला बदलने की चर्चाएं सच साबित होती हैं तो इसका असर न केवल महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे। फिलहाल सभी की नजरें प्रस्तावित बैठक और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।


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