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ट्रंप जो न कर सके, अब दिल्ली बनाएगी मुमकिन

नई दिल्ली । रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को अब चार साल से अधिक का समय जा चुका है, इस जंग ने लाखों लोगों की जान ली है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से बाधित किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को रोकने के लिए अपने दूसरे कार्यकाल में कई कूटनीतिक और धमकी भरे प्रयास किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब इस खूनी जंग को समाप्त करने और शांति बहाल करने के लिए भारत ने एक महत्वपूर्ण शांति प्रस्ताव दिया है।

दरअसल प्रस्ताव भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने 3 सितंबर को यूक्रेन की अपनी पहली स्वतंत्र यात्रा के दौरान पेश किया, जहां उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की और भारत की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया। भारत का यह तीन-सूत्रीय प्रस्ताव युद्ध के सबसे संवेदनशील और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है।भारत द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के मुताबिक ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना है। दोनों पक्षों से एक-दूसरे के एनर्जी प्लांट्स और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की अपील। इसके अलावा ब्लैक सी के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना। इतना ही नहीं ब्लैक सी में आवाजाही करने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी हमले को तुरंत रोकना।

भारत का यह प्रस्ताव अब तक आए अन्य देशों जैसे मिस्र और तुर्की (जो मुख्य रूप से व्यापारिक जहाजों पर केंद्रित थे) और अमेरिका (जो एनर्जी सीजफायर पर केंद्रित था) के प्रस्तावों की तुलना में अधिक व्यावहारिक और व्यापक माना जा रहा है। भारत ने इन सभी प्रमुख चिंताओं को एक साथ रखकर एक समग्र समाधान प्रस्तुत किया है। डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल में इस युद्ध को रोकने के लिए अथक प्रयास करते रहे, कभी धमकियां दीं तो कभी बातचीत का सहारा लिया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब भारत की यह पहल न केवल वैश्विक शांति के लिए एक नई उम्मीद जगाती है, बल्कि उस जटिल चुनौती का समाधान खोजने का प्रयास करती है, जिसमें एक वैश्विक शक्ति विफल रही।

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