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क्रूज हादसे में अब तक 9 मौतें 23 की बची जान

 जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा प्रदेश के सबसे बड़े जल हादसों में से एक बनकर उभरा है। नर्मदा नदी के बैकवाटर में पर्यटकों से भरा क्रूज डूबने से अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि प्रशासन ने 23 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस दर्दनाक घटना ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है बल्कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के दावों की भी पोल खोल दी है। हादसे के घंटों बाद भी कई लोग लापता हैं जिनकी तलाश में एनडीआरएफ और विशेष गोताखोरों की टीमें जुटी हुई हैं। हादसे में जीवित बचे दिल्ली निवासी प्रदीप कुमार की आपबीती सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। प्रदीप ने बताया कि उनकी आंखों के सामने उनकी पत्नी और चार साल का बेटा लहरों में गुम हो गए। उन्होंने क्रूज प्रबंधन पर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदीप के अनुसारए क्रूज पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे और आपात स्थिति पैदा होने पर क्रू सदस्यों ने यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि पर्यटकों को न तो लाइफ जैकेट दी गई और न ही चालक ने खतरे को भांपते हुए क्रूज को किनारे लगाया। किनारे पर खड़े लोग चिल्लाते रहेए लेकिन चालक वापस शुरुआती बिंदु पर जाने की जिद पर अड़ा रहाए जो अंततः मौत का कारण बना।

प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने पूरी रात घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की। डूबे हुए क्रूज को लोहे के तारों से खींचने की कोशिश की गईए लेकिन भारी वजन और पानी के दबाव के कारण सफलता नहीं मिली। अब भोपालए आगरा और हैदराबाद से आधुनिक उपकरणों के साथ विशेषज्ञों की टीमें बुलाई गई हैंए जो जलमग्न क्रूज के अंदर फंसे संभावित शवों या लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। जबलपुर के आईजी प्रमोद वर्मा ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में खराब मौसम और चालक की अदूरदर्शिता हादसे की मुख्य वजह लग रही है। हालांकिए प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या क्रूज पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे और क्या नियमों के विरुद्ध खराब मौसम में उसे संचालित किया गया। बरगी डैम के बैकवाटर की लहरों में डूबी यह नाव अपने पीछे कई अनसुलझे सवाल और अपनों को खो चुके परिजनों के आंसू छोड़ गई है। फिलहालए पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लापता लोगों के जीवित बचने की उम्मीदें समय बीतने के साथ कम होती जा रही हैं।

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