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मजदूरों वाली सैलरी में शाही जीवन

फर्श से अर्श पर पहुंचे कई नाम

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का इतिहास बेहद हैरान कर देने वाला है। राम मंदिर से जुड़ने के बाद इन आरोपियों के रहन-सहन और चाल-चलन में ऐसा बदलाव आया, मानो उनकी किस्मत ही पलट गई हो। जो लोग कभी एक दिन का खर्च चलाने के लिए दिनभर मशक्कत करते थे, वे आज लाखों में खेल रहे थे। उनका शाही-ठाठ और रुतबा किसी नवाब से कम नहीं था। राम मंदिर से जुड़ने के बाद, देखते ही देखते ये सभी आरोपी अमीर होते चले गए और महज कुछ ही दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंच गए। जिन्होंने कभी सपने में भी नोटों की गड्डियां नहीं देखी थीं, वे लाखों में खेलने लगे थे और अपनी हैसियत से ज्यादा संपत्ति बना ली थी। इसके बाद तो मानों राम मंदिर के इन कर्मचारियों का हाव-भाव ही बदल गया। उनका रहन-सहन किसी नवाबों से कम नहीं था और राम मंदिर परिसर में उनकी ठसक की चर्चा भी दूर-दूर तक फैल गई। एकाएक बढ़ते रुतबे से सभी लोग हैरान थे।

राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद से ही राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का प्रभाव दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा। स्थानीय स्तर पर शायद ही कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो जो टिन्नू से पहचान न बनाना चाहता रहा हो। इन्हें परिसर में कोई मुख्य दायित्व तो नहीं सौंपा गया था, लेकिन लोग इन्हें महासचिव चंपत राय की परछाई के रूप में जानते थे। सूत्र बताते हैं कि टिन्नू के मोबाइल में देश के मानिंद लोगों के नंबर फीड थे और वह समाज में ऊंचे पद पर बैठे हुए लोगों से बात कर अपना प्रदर्शन भी करता था। इस प्रकरण का मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र रहा, जो राममंदिर में नोट गिनने वाले कमरे में कर्मचारी था। सूत्र बताते हैं कि पहले सुरक्षा कर्मियों ने उसे ही पकड़ा था और उसके कौशल पुरी स्थित घर से 20 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी। कुछ ही वर्षों के भीतर इसने कई प्रॉपर्टी खरीद ली थीं। वह लगभग दो साल से चढ़ावे वाले रुपये गिनने का काम कर रहा था और मदद के लिए बने सुविधा सेंटर में तैनात था, उस पर चढ़ावा के वाउचर में गड़बड़ी करने का आरोप है। लवकुश मिश्र रिश्ते में अनुकल्प मिश्र का बहनोई है। पूरे गांव में उसकी बदली हुई माली हैसियत की चर्चा महीनों से थी। उसने बाहर भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाया था। मंदिर का चढ़ावा और नकदी गणना टीम में लवकुश भी शामिल था और उसके घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद होने का दावा है। केनरा बैंक से रिटायर होने के बाद ट्रस्ट कर्मी बने सुभाष को गणना के पूरे कामकाज की मुख्य जिम्मेदारी थी।  राम मंदिर में चंदा चोरी में गिरफ्तार करुणेश पांडेय का काम मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों को गणना कक्ष तक पहुंचाना और गिनना था। करुणेश पर आरोप है कि इन्होंने दानराशि चुराकर संपत्ति अर्जित की है। अनुकल्प ने ही इन्हें नौकरी पर रखवाया था और जांच में कई लाख रुपए बरामद हुए हैं। रमाशंकर मिश्र को भी राममंदिर में प्रमुख रूप से चढ़ावा की गिनती की जिम्मेदारी दी गई थी और वह नगदी गणना कक्ष में कर्मचारी के पद पर थे। इनके पास से भी कई लाख रुपए बरामद हुए हैं। एक अन्य अभियुक्त मनीश कुमार यादव रिश्ते में टिन्नू का भतीजा बताया जाता है। 


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