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1 अप्रैल फूल दिवस के रूप में मनाया जाता है

1 अप्रैल दुनिया भर में मुख्य रूप से अप्रैल फूल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हंसी-मजाक, प्रैंक और बेवकूफ बनाने का दिन है। इसके अलावा, यह दिन भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। 


1. अप्रैल फूल दिवस का इतिहास 

फ्रांसीसी संबंध (1582)ः सबसे लोकप्रिय कहानी के अनुसार, जब फ्रांस ने पोप ग्रेगरी  द्वारा शुरू किए गए ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया, तो नया साल 1 जनवरी से मनाया जाने लगा। जो लोग पुराने जूलियन कैलेंडर के अनुसार अभी भी 1 अप्रैल को नया साल मनाते थे, उन्हें “अप्रैल फूल“ कहा जाने लगा।

रोमन त्यौहार : कुछ इतिहासकार इसे मार्च के अंत में मनाए जाने वाले प्राचीन रोमन त्यौहार ’हिलारिया’ से जोड़ते हैं, जहाँ लोग भेष बदलकर दूसरों का मजाक उड़ाते थे।

1 अप्रैल अप्रैल फूल दिवस के रूप में मनाया जाता है। दुनियाभर में इस दिन को मूर्ख दिवस कहते हैं। आज के दिन हर कोई एक दूसरे के साथ मजाक करते हैं, ये बस हंसी मजाक के लिए ही होता है। इस दिन लोग आपस में एक दुसरे को हसीं मजाक में मूर्ख बनाते हैं लेकिन अन्य दिनों की तरह इस दिन मूर्ख बना व्यक्ति नाराज या गुस्सा नहीं होता जो इस दिन की सबसे बड़ी खासियत है। इस दिन आधिकारिक छुट्टी नहीं होती है, लेकिन लोग अपने दोस्त रिश्तेदार, ऑफिस में ये दिन अच्छे से मस्त होकर सेलेब्रेट करते हैं। पारंपरिक तौर पर कुछ देशों में जैसे न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किए जाते थे। आईए आज लाइव हिन्दुस्तान आपको बताएगा कि इस दिन की शुरुआत कब और कैसे हुई। इस दिन का महत्व क्या है और इससे क्या किस्से जुड़े हैं। जिन शहरों में दोपहर के बाद मजाक करने वालों को अप्रैल फूल कहा जाता है। ब्रिटेन के अखबार जो अप्रैल फूल पर मुख्य पृष्ठ निकालते हैं वे ऐसा सिर्फ पहले (सुबह के) एडिशन के लिए ही करते हैं। इसके अलावा फ्रांस, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान रूस, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में जोक्स का सिलसिला दिन भर चलता रहता है।

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