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एमएससीआई ईएम टॉप-10 से भारतीय कंपनियां बाहर

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी वैश्विक शेयरों में असाधारण तेजी के बीच भारतीय कंपनियों को एक बड़ा झटका लगा है। पिछले दो दशकों में यह पहली बार है जब एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स (ईएम) इंडेक्स के शीर्ष 10 शेयरों में कोई भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है। यह ऐतिहासिक बेदखली एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे भारतीय दिग्गजों को इस प्रतिष्ठित सूची से बाहर धकेलने वाली एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के शेयरों की आंधी का परिणाम है।

यह बदलाव वैश्विक पूंजी प्रवाह के बदलते रुझान और उभरते बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क के रूप में काम करने वाले इस इंडेक्स में भारत के घटते प्रभाव को दर्शाता है। एक घ्रिपोर्ट के मुताघ्बिक भारत के सबसे बड़े शेयर, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), मार्च में क्रमशः सातवें और आठवें स्थान से खिसककर अब 11वें और 12वें स्थान पर आ गए हैं। इस गिरावट के कारण इंडेक्स में उनका व्यक्तिगत भार 0.8 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। एमएससीआई ईएम इंडेक्स, जो 700 अरब डॉलर से अधिक के पैसिव फंडों के लिए एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क है और एक्टिव फंडों द्वारा भी बारीकी से देखा जाता है, में भारत की यह कमजोर स्थिति चिंता का विषय है। आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज के एक वरिष्ठ अघ्धिकारी के अनुसार अन्य देशों में एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू कंपनियों को शीर्ष 10 से बाहर कर दिया है, जिससे निवेश नीतियों पर गहरा असर पड़ेगा। इस नाटकीय बदलाव के पीछे प्रमुख कारण एआई और प्रौद्योगिकी आधारित बाजारों जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का शानदार प्रदर्शन है।

जहां एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर अपने उच्चतम स्तर से क्रमशः लगभग 26 फीसदी और 20 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं, वहीं ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी), सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी एआई-संबंधित कंपनियों के शेयरों में क्रमशः 48 फीसदी, 147 फीसदी और 194 फीसदी की जोरदार उछाल देखी गई है। नुवामा ने बताया, एआई और तकनीक के बल पर ये बाजार वैश्विक पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों में भारतीय शेयरों की हैसियत कम हुई है। परिणामस्वरूप, एमएससीआई ईएम इंडेक्स में भारत का कुल भार घटकर छह साल के निचले स्तर 10.87 फीसदी पर आ गया है, जो 2024 के शीर्ष स्तर का लगभग आधा है। यह दर्शाता है कि वैश्विक निवेश परिदृश्य में भारतीय बाजार को अब अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल का सामना करना पड़ रहा है।

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