Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

आज चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन है यह दिन स्कंदमाता को समर्पित है

आज चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन है यह दिन स्कंदमाता को समर्पित है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को ममता, शक्ति और मोक्ष प्रदान करता है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं, इसलिए इन्हें यह नाम मिला। इनकी पूजा से संतान सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है। कैसा है स्कंदमाता का स्वरूप?  स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना भी कहते हैं। देवी की चार भुजाएं हैं। देवी की गोद में भगवान स्कंद बैठे हुए हैं। उनके दाहिने तरफ की नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ ही उन्हें संतान सुख मिलता है।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि और महत्वः

स्वरूपः मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली हैं, जो अपनी गोद में बाल कार्तिकेय को लिए हुए हैं। इनका वाहन सिंह है।

पूजा विधिः सुबह स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र पहनें। माता की प्रतिमा को नमन करें, कुमकुम, अक्षत और कमल का फूल अर्पित करें।

मंत्रः सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।

भोगः माता रानी को केले (ठंदंदं) का भोग अत्यंत प्रिय है, जो स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है।

महत्वः स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और वे परम शांति का अनुभव करते 

पूजा विधि 

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें।

पूजा स्थल पर देवी की प्रतिमा स्थापित करें।

हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।

मां स्कंदमाता की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।

मां को चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, गंध और सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें।

स्कंदमाता को पीले रंग के फूल विशेष रूप से कमल का फूल अति प्रिय है, इसलिए उन्हें कमल का फूल या अन्य पीले फूल चढ़ाएं।

मां को केला, घर पर बनी मिठाई का भोग लगाएं।

मां के मंत्रों का जप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

अंत में स्कंदमाता की आरती करें और सभी में प्रसाद बांटें।

इसके बाद पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

स्कंदमाता के भोग 

स्कंदमाता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप उन्हें खीर, मिठाई, या मौसमी फल का भोग लगा सकते हैं।

Comments (0)

Leave a Comment