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आप में हुई बगावत कांग्रेस के लिए वापसी करने का बेहतर मौका

नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है। आप पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालांकि यह कदम बीजेपी के लिए संख्यात्मक मजबूती लेकर आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा की अगुवाई में हुए दल-बदल में स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे नाम शामिल हैं। इन नेताओं के जाने से आप को संगठनात्मक स्तर पर झटका जरूर लगा है, लेकिन इसमें से किसी का मजबूत जनाधार न होने के कारण बीजेपी को जमीनी फायदा सीमित मिलता दिख रहा है। लेकिन राजनैतिक पंडितों का कहना है कि बीजेपी को इस बदलाव से राज्यसभा में संख्यात्मक बढ़त जरूर मिली है, लेकिन यह बदलाव सीधे वोट बैंक में तब्दील होगा, इस पर अभी सवाल बना हुआ हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस इस बदलाव को अपने लिए एक राजनीतिक मौके के रूप में देख रही है। बात दें कि आम आदमी पार्टी का उदय कांग्रेस विरोधी आंदोलन से हुआ था और आप ने दिल्ली व पंजाब में कांग्रेस की जगह ली थी। अब इसी पृष्ठभूमि में हो रहे बिखराव को कांग्रेस अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकती है। खासकर पंजाब, गुजरात, गोवा और दिल्ली जैसे राज्यों में कांग्रेस को नए सिरे से राजनीतिक जमीन मिलने की संभावना जाहिर की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंजाब में बीजेपी की सीमित पकड़ और किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि के कारण वहां कांग्रेस को पुनर्गठन का मौका मिल सकता है। वहीं गुजरात और गोवा में भी आप की कमजोर होती स्थिति कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दिल्ली की राजनीति में भी आम आदमी पार्टी के खिलाफ कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को फिर से साधने की कोशिश कर सकती है। खासकर दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना सकती है। कुल मिलाकर, आम आदमी पार्टी की यह टूट सिर्फ एक दल का संकट नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश के कई राज्यों में सियासी समीकरण बदलने का संकेत भी माना जा रहा है।


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