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अब लोकल ट्रेनों में भी मिलेंगे स्वचालित दरवाजे

नई दिल्ली। भारत में करोड़ों लोगों की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों के सफर को अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक क्रांतिकारी पहल की है। अमृत भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की तर्ज पर अब साधारण लोकल ट्रेनों के डिब्बों का भी कायाकल्प किया जा रहा है। इस आधुनिक बदलाव की शुरुआत मध्य रेलवे से हो चुकी है, जहां यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीक से लैस नए कोच पेश किए गए हैं। यह पहल विशेष रूप से मुंबई जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले उपनगरीय नेटवर्क में यात्रियों के लिए गेमचेंजर साबित होगी। मध्य रेलवे को हाल ही में अपनी पहली 12 डिब्बों वाली नॉन-एसी ईएमयू (इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) रैक प्राप्त हुई है, जो वर्तमान में कुर्ला कार शेड में अंतिम निरीक्षण के अधीन है। इस नई रैक की सबसे बड़ी विशेषता इसके स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजे हैं। इन दरवाजों में एंटी-ड्रैग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो चलती ट्रेन से दुर्घटनावश गिरने या गेट पर लटककर यात्रा करने जैसी जानलेवा घटनाओं पर प्रभावी लगाम लगाएगी। अक्सर देखा जाता है कि भीड़ के कारण यात्री गेट पर असुरक्षित तरीके से यात्रा करते हैं, लेकिन अब ट्रेन तभी चलेगी जब दरवाजे पूरी तरह बंद होंगे।

यात्रियों के आराम के लिए कोच के भीतर भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। द्वितीय श्रेणी में जहां मजबूत स्टेनलेस स्टील की सीटें दी गई हैं, वहीं प्रथम श्रेणी के यात्रियों के लिए कुशनयुक्त सीटों का प्रबंध किया गया है। कोच के अंदर वेंटिलेशन को बेहतर बनाने के लिए खिड़कियों को पहले से अधिक चौड़ा किया गया है और छतों पर विशेष वेंटिलेशन यूनिट्स लगाई गई हैं, जो प्रति घंटे 10,000 घन मीटर ताजी हवा की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। इससे भारी भीड़ के दौरान भी यात्रियों को घुटन महसूस नहीं होगी। सुरक्षा के मोर्चे पर, इन नई ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे, धुआं और ताप पहचान प्रणाली (स्मोक डिटेक्शन सिस्टम) और एक संशोधित आपातकालीन अलार्म सिस्टम लगाया गया है। किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की त्वरित निकासी के लिए चौड़ी सीढ़ियां और विशेष ट्यूबलर पार्टीशन दिए गए हैं। भारतीय रेलवे की इस पहल का उद्देश्य लोकल ट्रेनों के पारंपरिक सफर को विश्वस्तरीय मानकों के करीब लाना है, जिससे दैनिक यात्रियों का हर सफर सुरक्षित, सुखद और तनावमुक्त हो सके। जल्द ही इस तकनीक को देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जाएगा।

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