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अमेरिका ने मोजतबा खामेनेई पर रखा 84 करोड़ का इनाम

वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के नए शीर्ष नेतृत्व को सीधे निशाने पर ले लिया है। एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस कार्यक्रम के तहत ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई समेत शासन के कई प्रमुख स्तंभों पर 10 मिलियन डॉलर (लगभग 84 करोड़ रुपये) तक के इनाम की घोषणा की है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका लगभग 2,500 मरीन सैनिकों की एक नई टुकड़ी और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को क्षेत्र की ओर रवाना कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की तैनाती से इलाके में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में भारी वृद्धि होगी।

अमेरिकी नोटिस में विशेष रूप से उन अधिकारियों को लक्षित किया गया है जो ईरान की सत्ता और सैन्य तंत्र में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इनाम की इस सूची में मोजतबा खामेनेई के अलावा डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अली असगर हेजाजी, सैन्य सलाहकार मेजर जनरल यहया रहीम सफावी, सलाहकार अली लारीजानी, आंतरिक मामलों के मंत्री ब्रिगेडियर जनरल एस्कंदर मोमेनी और खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये व्यक्ति इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के उन अंगों का संचालन करते हैं, जो वैश्विक स्तर पर आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले व्यक्ति को न केवल नकद पुरस्कार दिया जाएगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है। यह कड़ा रुख आयतुल्लाह अली खामेनेई और अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारियों की हालिया मौत के बाद जारी सैन्य अभियानों की पृष्ठभूमि में अपनाया गया है।

इस वैश्विक खींचतान के बीच भारत के हितों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले कई जहाज फंसे हुए हैं, जिससे व्यापारिक गलियारों में चिंता व्याप्त है। हालांकि, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान और भारत मित्र देश हैं और दोनों के हित व विश्वास समान हैं। राजदूत ने आश्वासन दिया है कि ईरान इस समस्या को हल करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब ईरान के नए नेतृत्व को पूरी तरह अलग-थलग करने और अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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