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अमेरिकी वायुसेना को भारी नुकसान

वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक भीषण हवाई युद्ध का रूप ले चुका है। हालिया रिपोर्ट्स और अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में अमेरिकी वायुसेना को अपूरणीय क्षति हुई है। अमेरिका को न केवल दुश्मन के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से चुनौती मिल रही है, बल्कि तकनीकी खराबी और आपसी तालमेल की कमी (फ्रेंडली फायर) ने भी इस नुकसान को बढ़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका के कम से कम 16 सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं, जिनमें बेहद महंगे ड्रोन और रिफ्यूलिंग टैंकर शामिल हैं।

इस हवाई युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान एमक्यू-9 रीपर ड्रोन्स को हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 10 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं। इनमें से 9 ड्रोन्स को ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया, जबकि एक ड्रोन जॉर्डन के एयरफील्ड पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले की चपेट में आ गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इन ड्रोन्स को जानबूझकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में भेजता है क्योंकि ये मानव रहित हैं और इनके नष्ट होने पर मानवीय क्षति नहीं होती, जिससे ये कम नुकसानदेह श्रेणी में आते हैं। हालांकि, युद्ध का सबसे दुखद पहलू तकनीकी गलतियां और आपसी तालमेल का अभाव रहा है। एक ऑपरेशन के दौरान केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के सभी 6 सदस्यों की मौत हो गई। वहीं, कुवैत में एक बड़ी चूक के कारण अपनी ही सेना ने गलत पहचान के चलते तीन अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया। इसके अलावा, सऊदी अरब स्थित एक बेस पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में 5 अन्य केसी-135 विमान क्षतिग्रस्त हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि वे इस बार पूर्ण एयर सुपीरियरिटी हासिल करने में विफल रहे हैं। उन्हें केवल स्थानीय स्तर पर ही बढ़त प्राप्त है, जबकि ईरान का पूरा आकाश अभी भी उनके नियंत्रण से बाहर है। हाल ही में एक अत्याधुनिक एफ-35 (थ्-35) फाइटर जेट को भी ईरानी गोलाबारी के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। ईरान ने अपने ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए कतर और सऊदी अरब को निशाना बनाना तेज कर दिया है, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर खतरा बढ़ गया है।


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