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अफगानिस्तान और पाकिस्तान की जंग बढ़ने के आसार

काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब एक भीषण युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। हाल ही में पाकिस्तानी विमानों और ड्रोनों द्वारा अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान ;आईईए के अनुसारए इन हमलों में अब तक 408 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 265 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इस भीषण रक्तपात के बाद अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

काबुल में विदेशी राजनयिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुत्तकी ने पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई की तुलना गाजा के हालातों से की। उन्होंने बताया कि 16.17 मार्च की रात को किए गए इन हमलों का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि बमबारी एक नशा मुक्ति केंद्र पर की गईए जहां निहत्थे नागरिकों का उपचार चल रहा था। रमजान के पवित्र महीने के अंतिम दिनों और ईद.उल.फितर की पूर्व संध्या पर की गई इस कार्रवाई को अफगान सरकार ने इस्लामी मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का घोर अपमान बताया है। मुत्तकी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर चीन और संयुक्त अरब अमीरात के समक्ष स्पष्ट किया कि यह हमला उस समय हुआ जब ये देश मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का सैन्य तंत्र कूटनीति के बजाय युद्ध को प्राथमिकता दे रहा है। अफगान विदेश मंत्री ने दोटूक कहा कि अब पाकिस्तान की शांति की नीयत पर से उनका भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पाकिस्तान की ये हरकतें न केवल अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला हैंए बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास परियोजनाओं को अस्थिर करने की एक सोची.समझी साजिश का हिस्सा हैं। अफगानिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सेना अपनी रक्षा के लिए उसी तीव्रता से जवाब देने के लिए तैयार है। मुत्तकी ने दावा किया कि अफगान बलों ने हमेशा केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया हैए जबकि पाकिस्तानी सेना नागरिक सुविधाओं और निर्दोष लोगों को ध्वस्त कर रही है। सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि अफगानिस्तान की ओर से जल्द ही कोई बड़ी जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। ईद के मौके पर क्षेत्र में व्याप्त यह तनाव किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता हैए जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था दांव पर लगी हुई है।

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