Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

अशोक खरात जैसे ढोंगी बाबाओं पर लगाम कब लगेगी ?

आखिरकार समाज में आस्था के नाम पर पनप रहे ऐसे अनगिनत ढोंगी बाबाओं पर लगाम कब और कैसे लगेगी यह गहरा प्रश्रचिन्ह गहरा रहा है। ऐसे में समाज में जागरूकता, कानून का सख्त पालन और सामाजिक जिम्मेदारी साथ-साथ नहीं चलेंगे, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे। हाल के समय में अशोक खरात (कैप्टन बाबा) को लेकर जो आरोप और विवाद सामने आए हैं, उन्होंने समाज में गहरी चिंता पैदा की है। खुद को धार्मिक या सामाजिक नेता बताने वाले ऐसे व्यक्तियों का आचरण जब नैतिकता और कानून के दायरे से बाहर जाता है, तो वह न केवल अपने अनुयायियों का भरोसा तोड़ता है बल्कि पूरे समाज को बदनाम करता है।

कहा जाता है कि बाबा के नाम पर लोगों की आस्था का फायदा उठाकर कई तरह की अनियमितताएँ और शोषण किए जाते हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल व्यक्तिगत अपराध है बल्कि समाज की संवेदनाओं के साथ धोखा भी है। आस्था का स्थान हमेशा पवित्र माना गया है, और जब उसी का दुरुपयोग होता है, तो उसका असर व्यापक होता है।ऐसे मामलों में सबसे बड़ी जिम्मेदारी कानून और प्रशासन की होती है कि वे निष्पक्ष जांच करें और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करें। साथ ही समाज को भी जागरूक रहने की जरूरत है, ताकि अंधभक्ति और बिना जांच-पड़ताल के किसी के पीछे चलने से बचा जा सके। यदि कोई व्यक्ति समाज सेवा या धर्म के नाम पर गलत कार्य करता है, तो वह सच में समाज के नाम पर कलंक ही कहलाएगा। ऐसे मामलों में सख्ती, पारदर्शिता और जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान है।

समाज में जब भी कोई स्वयंभू संत, बाबा या चमत्कारी व्यक्ति तेजी से प्रसिद्धि पाता है, तो उसके पीछे केवल आम लोगों की आस्था ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों का समर्थन भी बड़ा कारण होता है। अशोक खरात उर्फ कैप्टन बाबा्य के मामले में भी यही सवाल उठता है कि आखिर वीवीआईपी लोग उनके पास क्यों जाते थे? सबसे पहले, आस्था और अंधविश्वास का मिश्रण इस प्रवृत्ति की जड़ में है। सत्ता और पैसे के शिखर पर बैठे लोग भी जीवन की अनिश्चितताओंकृराजनीतिक भविष्य, स्वास्थ्य, परिवार या सत्ता की स्थिरताकृको लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे में वे चमत्कार या आशीर्वाद की तलाश में इन बाबाओं की शरण लेते हैं। दूसरा कारण है प्रभाव और नेटवर्किंग। कई बार ऐसे बाबा केवल धार्मिक व्यक्तित्व नहीं होते, बल्कि वे एक पावर हब बन जाते हैं, जहां नेता, अधिकारी और व्यवसायी एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इस तरह उनके दरबार एक अनौपचारिक नेटवर्किंग मंच में बदल जाते हैं, जहां संपर्क बनाना आसान होता है।तीसरा पहलू है छवि निर्माण किसी लोकप्रिय बाबा के साथ दिखना कुछ नेताओं के लिए जनता के बीच धार्मिक और संस्कारी छवि बनाने का माध्यम बन जाता है। इससे वे अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।चौथा और चिंताजनक कारण है व्यक्तिगत लाभ और संरक्षण की उम्मीद। कुछ लोग यह मानते हैं कि ऐसे बाबा उनके काम बनवा सकते हैं, समस्याएं सुलझा सकते हैं या उन्हें किसी तरह का आध्यात्मिक संरक्षण दे सकते हैं। यह मानसिकता लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक सोच के लिए खतरनाक है।

लेकिन इस पूरे प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जब वीवीआईपी स्तर के लोग ऐसे व्यक्तियों के पास जाते हैं, तो आम जनता में उनकी विश्वसनीयता स्वतः बढ़ जाती है। इससे अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है और समाज में तर्क और विवेक की जगह कमजोर पड़ती है।  यह जरूरी है कि समाजकृविशेषकर प्रभावशाली वर्गकृतर्क, वैज्ञानिक सोच और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे। किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण और जवाबदेही के चमत्कारी मान लेना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी नुकसानदायक हो सकता है।

अशोक खरात उर्फ कैप्टन बाबा का नाम हाल के वर्षों में उनकी अकूत संपत्ति और गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। नासिक से शुरू हुआ यह मामला केवल एक तथाकथित धार्मिक गुरु्य की कहानी नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर खड़े किए गए एक विशाल और संदिग्ध साम्राज्य का खुलासा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, अशोक खरात ने खुद को ज्योतिषी, तांत्रिक और चमत्कारी शक्तियों वाला व्यक्ति बताकर लोगों, खासकर महिलाओं का विश्वास जीता। इसी विश्वास का दुरुपयोग कर उन्होंने न केवल आर्थिक लाभ अर्जित किया, बल्कि शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर अपराधों को भी अंजाम दिया।सबसे चौंकाने वाला पहलू उनकी संपत्ति को लेकर सामने आया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति होने का अनुमान हैकृकुछ जगहों पर यह आंकड़ा 200 करोड़ से लेकर 500 करोड़ और यहां तक कि 1500 करोड़ रुपये तक बताया गया है। यह संपत्ति न केवल उनके नाम पर, बल्कि पत्नी, बेटी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी पाई गई, जिससे बेनामी निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका मजबूत होती है।जांच में यह भी सामने आया कि इस तथाकथित आध्यात्मिक साम्राज्य के पीछे एक संगठित तंत्र काम कर रहा थाकृजिसमें कोड लैंग्वेज, गुप्त कैमरे और ब्लैकमेलिंग के नेटवर्क शामिल थे।इसके अलावा, उनके पास से सैकड़ों आपत्तिजनक वीडियो और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की गहराई को दर्शाते हैं।

यह मामला केवल व्यक्तिगत अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार राजनीति और प्रशासन तक भी जुड़ते दिखाई दिए हैं, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति की अकूत संपत्ति का नहीं, बल्कि उस तंत्र का प्रतीक है जिसमें अंधविश्वास, लालच और सत्ता का गठजोड़ समाज के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।


Comments (0)

Leave a Comment