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असम में बिना सेनापति उतरेगी कांग्रेस

नई दिल्ली। असम में विधानसभा का चुनावी बिगुल बज चुका है। चुनाव को लेकर सभी पार्टियों अब मैदान में हैं। 9 अप्रैल 2026 को असम में वोटिंग होना है। लेकिन कांग्रेस असम चुनाव में अपनी तैयारी शुरू करने से पहले ही अपने दो ‘प्रमुख सेनापति’ को खो चुकी है।

चुनाव से ठीक पहले पार्टी के भीतर भगदड़ जैसे हालात हैं। एक के बाद एक बड़े चेहरे पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। इसके बाद सवाल उठता है कि क्या बिना मजबूत नेतृत्व के कांग्रेस यह लड़ाई जीत पाएगी? कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जिन्हें इस बार असम में रणनीतिक कमान सौंपी गई थी, अब सबसे कठिन परीक्षा का सामना कर रही हैं। यह सिर्फ नेताओं के जाने की कहानी नहीं है। यह संगठन की कमजोरी और नेतृत्व की चुनौती की कहानी है। लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा का बीजेपी में जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। बात दें कि असम में कांग्रेस की बिगाड़ती स्थिति के लिए राहुल गांधी के करीबी प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगाई को जिम्मेदार माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं था। यह उनकी राजनीतिक क्षमता की अग्निपरीक्षा माना जा रहा था। लेकिन चुनाव से पहले ही जो हालात बने हैं, उन्होंने पूरे प्लान को झटका दे दिया है। वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ना, अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व पर सवाल ये सब मिलकर कांग्रेस के अभियान को कमजोर कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रियंका गांधी वाड्रा इस संकट को संभाल पाएंगी या असम भी उनके लिए एक और असफल प्रयोग बनेगा। 

असम में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका दो वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने से लगा है। ये दोनों नेता चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे थे। इसके बाद उनके जाने से न सिर्फ संगठन कमजोर हुआ है, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरा है। पार्टी के अंदर भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई नेता मानते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई की कार्यशैली से नाराजगी बढ़ी है। उन पर एकतरफा फैसले लेने और भरोसे की कमी के आरोप लग रहे हैं। उम्मीदवार चयन से लेकर कैंपेन मैनेजमेंट तक, कई फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.। इससे साफ है कि कांग्रेस की समस्या सिर्फ बाहर नहीं, भीतर भी है। 

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