Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles
Advertisement
Advertisement Banner

बालाजी महाराज को लगाया जाता है चॉकलेट और टॉफी का भोग

नई दिल्ली । राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहाँ भगवान बालाजी महाराज को चॉकलेट और टॉफी का भोग लगाया जाता है। सीकर जिले के चारण का बास के पास स्थित यह नान्याजी महाराज मंदिर भले ही बहुत प्राचीन न हो, लेकिन लोगों की इस पर अटूट श्रद्धा है। यहाँ की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में मात्र दर्शन करने से सभी रोग और परेशानियां दूर हो जाती हैं। भक्त यह भी मानते हैं कि यहाँ आने से नौकरी और व्यवसाय में अच्छा लाभ होता है, जिससे आर्थिक समृद्धि आती है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में बालाजी महाराज और उनके परम भक्त की प्रतिमा एक साथ विराजमान हैं, जो आस्था का केंद्र बिंदु है। यह मंदिर न केवल सीकर का एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र भी बन गया है। 

इस मंदिर का महत्व सीकर की प्रसिद्ध चौबीस कोसीय परिक्रमा में भी निहित है, क्योंकि इस मंदिर से होकर गुजरने पर ही परिक्रमा पूर्ण मानी जाती है। बालाजी महाराज की प्रतिमा होने के कारण प्रत्येक मंगलवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो अपने आराध्य को चॉकलेट और टॉफी के रूप में विशेष भोग अर्पित करते हैं। मांगलिक अवसरों पर तो यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, और मंदिर कमेटी द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जहाँ सभी भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर की एक और खास बात यह है कि इसके बाहर एक ही टॉफी और चॉकलेट की दुकान है, जहाँ कोई दुकानदार मौजूद नहीं होता। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दुकान से टॉफी लेते हैं और वहीं पर पैसे रखकर चले जाते हैं। यह माना जाता है कि उस पूरे क्षेत्र का ध्यान स्वयं नान्याजी महाराज करते हैं, जिससे यह अनोखी ईमानदारी की व्यवस्था सफलतापूर्वक चलती है। यह मंदिर खेतों के बीचों-बीच बना हुआ है, जहाँ दर्शन करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एक सुकून भरा अनुभव भी होता है। मंदिर के बाहर एक छोटा चमत्कारी कुआं भी है, जिसमें लगातार धुनी (अग्नि) जलती रहती है। यह भी इस मंदिर की विशिष्ट पहचान है। भक्त मंदिर के अंदर बालाजी के पास दीया जलाने के बजाय बाहर इस कुएं के पास उनके नाम का दीया जलाते हैं। वे अपने साथ कुएं में जल रही धुनी की राख भी लेकर जाते हैं, जिसे पवित्र माना जाता है। यह मंदिर सीकर के अन्य सभी मंदिरों से अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारी मान्यताओं के कारण बिल्कुल अलग है। 

Comments (0)

Leave a Comment