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बढ़ते खर्च और जंग के कारण विदेश जाने से बेहतर देश ही भला

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब लोगों के घूमने-फिरने के तौर-तरीकों पर दिख रहा है। सुरक्षा की चिंता, बढ़ता खर्च और उड़ानों में हो रही देरी के कारण लोग विदेश जाने के बजाय अपने ही देश में घूमना पंसद कर रहे है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल घरेलू पर्यटन में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। दरअसल विदेश यात्रा कम होने की बड़ी वजह इसका महंगा होना भी है। जंग के कारण तेल की बढ़ती कीमतों और उड़ानों के लंबे रास्तों की वजह से हवाई टिकटों के दाम 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़े हैं। 

पर्यटन विशेषज्ञ ने बताया कि बदलते रुझानों के कारण पर्यटक अपनी पसंद सीमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जंग की वजह से अब पर्यटकों के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं, वे पूर्वी देशों की यात्रा करें या फिर अपने देश के पर्यटन स्थलों को चुनें। इस बदलते रुख का घरेलू पर्यटन पर सकारात्मक असर पड़ेगा और इससे काफी बढ़ावा मिलेगा। बढ़ते खर्चों के बीच तालमेल बिठाने के तरीके पर उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में विदेश घूमने की इच्छा अब भी प्रबल है, लेकिन बजट की वजह से उन्हें कुछ समझौते करना पड़ रहा है। पर्यटन विशेषज्ञ के मुताबिक, यदि पर्यटक विदेश जाने की योजना बनाते हैं, तब वे अपना ट्रिप रद्द करने के बजाय उसकी अवधि कम कर देते हैं, जैसे कि 10 दिन के बजाय अब केवल 6-8 दिन की यात्रा कर रहे हैं, ताकि खर्च को नियंत्रित कर सके। इसके साथ ही, कई लोग अपने घर के करीब वाले देशों को चुन रहे हैं! अपनी नजदीकी और कम यात्रा खर्च की वजह से म्यांमार, नेपाल, भूटान, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देश अब पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं। 

ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन से जुड़े एक जानकार ने बताया कि हालांकि घरेलू पर्यटन में निश्चित रूप से उछाल देखा जा रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में करीब 50 से 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। दूसरी ओर, घरेलू पर्यटन में पहले ही लगभग 35 प्रतिशत का उछाल देखा गया है, और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, लोगों ने योजनाएं बनाना और एडवांस बुकिंग करना शुरू कर दिया है, जो निकट भविष्य में घरेलू यात्रा के लिए मजबूत उत्साह का संकेत देता है। लोग पहाड़ी क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर, केरल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों की यात्रा करने के इच्छुक हैं। 

गौरतलब है कि जंग के कारण विदेशी पर्यटकों की संख्या में आ रही कमी के बीच, भारत के पर्यटन क्षेत्र ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहले ही सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अब ध्यान भारत को एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने पर है। इसके लिए क्षेत्र से जुड़े लोग यूरोप के प्रमुख ट्रैवल एजेंटों और टूर ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि भारत की सांस्कृतिक विरासत, वेलनेस टूरिज्म, एडवेंचर और लग्जरी अनुभवों जैसी विविध पर्यटन पेशकशों को दुनिया के सामने रखा जा सके। पर्यटन विशेषज्ञ ने बताया कि पर्यटकों की पसंद में साफ बदलाव दिख रहा है। उन्होंने कहा, यात्री सबसे पहले घरेलू पर्यटन स्थलों में रुचि दिखा रहे हैं, और उसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को चुन रहे हैं। फिलहाल घरेलू और दक्षिण-पूर्व एशियाई दोनों जगहों के लिए बुकिंग की जा रही है।

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