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ब्रायन का शतक न लगा पाने का मलाल

चेन्नई । जिम्बाब्वे के सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ सुपर-8 मुकाबले में खेली अपनी पारी से संतुष्ट हैं पर उन्हें इस बात का मलाल है कि वह इस मैच में शतक नहीं लगा पाये। बेनेट ने भारतीय टीम के खिलाफ 97 रनों की आक्रामक पारी खेली थी हालांकि अन्य बल्लेबाजों से उन्हें सहायता नहीं मिली। इस मैच में भारतीय टीम से जीत के लिए मिले 257 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्म्बाब्वे की टीम छह विकेट पर 184 रन ही बना पायी। बेनेट ने कहा, अगर मैं शतक पूरा कर लेता तो अच्छा होता।

क्रिकेट में कभी-कभी ऐसा ही होता है जब इस प्रकार के अवसर मिलते हैं। मैं हमेशा उस स्थिति में नहीं रहूंगा। मुझे खुशी है कि मैंने अच्छी पारी खेली पर निराशा इस बात की रहेगी कि टीम को जीत नहीं दिला पाया। उन्होंने कहा, जब भी कोई नया बल्लेबाज क्रीज पर उतरता तो मैं उससे यही कहता कि गेंद को अच्छी तरह से देखो और फिर उस पर शॉट लगाओ। मैं क्या कर रहा हूं ये मत देखो, तुम अपना काम करो। हमारे लिए अच्छी साझेदारी निभाना जरूरी था। बेनेट ने कहा कि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को खेलना कठिन था। मैं पहली बार उनके खिलाफ खेल रहा था। वह शीर्ष स्तर के गेंदबाज हैं। मैं बस यही सोच रहा था की गेंद पर अपना ध्यान बनाये रखूं और अपना स्वाभाविक खेल खेलूं।

गेंद मेरे करीब थी और मैंने उस पर जोरदार शॉट लगाया। उन्होंने कहा, 250 से 260 रन के लक्ष्य को हासिल करना बेहद कठिन होता है। यह मैदान पर जाकर अपने प्रदर्शन को दिखाने के साथ ही स्कोरबोर्ड पर ध्यान न देते हुए अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने और अपने मजबूत पक्षों के अनुसार खेलने का अवसर था। अगर परिणाम अच्छा निकलता है तो ठीक है, अगर नहीं निकलता तो भी ठीक है। आज परिणाम वैसा नहीं रहा जैसा हम चाहते थे। बेनेट ने कहा कि भले ही उनकी टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई है लेकिन सुपर आठ में जगह बनाने से उनकी टीम को काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा,  हमने पहली बार सुपर आठ के लिए क्वालीफाई किया है, इसलिए जाहिर है कि हमारे लिए इस टूर्नामेंट में कई शानदार पल रहे हैं और हम इससे उत्साहित हैं। हमे इस टूर्नामेंट में भारत, वेस्टइंडीज जैसी टीमों से खेलने से काफी कुछ सीखने को मिला है।

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