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देश की एक ऐसी फैक्ट्री जहां इंसान नहीं 57 रोबोट 24 घंटे करते हैं काम

चेन्नई। चेन्नई एयरपोर्ट से करीब 50 किलोमीटर दूर ओरागडम के स्पेशल इकोनॉमिक जोन में स्थित एक फैक्ट्री है। जिसके भीतर आधी रात में अल्ट्रावॉयलेट रोशनी की हल्की चमक तो दिखाई देती है, लेकिन शोर-गुल सुनाई नहीं देता है। चारों ओर सन्नाटा और बीच-बीच में आती ‘बीप’ की आवाजें। यहां न इसांनी मजदूरों की हलचल है, न शिफ्ट बदलने की चहल-पहल। यह है पॉलिमेटिक की ‘डार्क फैक्ट्री’, जिसे देश की पहली और दुनिया की तीसरी पूर्णतरू स्वचालित इकाई बताया जा रहा है। 

इस फैक्ट्री में 125 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित करीब 57 रोबोटिक मशीनें वर्ष 2018 से लगातार काम कर रही हैं। इनकी खासियत यह है कि ये सालभर 24 घंटे संचालित रहती हैं और केवल साल में एक बार 30 मिनट के मेंटेनेंस ब्रेक के लिए रुकती हैं। हर मशीन की अनुमानित आयु 25 वर्ष बताई गई है। 

सबसे आश्चर्य और हैरानी की बात तो यह है कि फैक्ट्री के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मात्र 002 दर्ज किया गया, जो लगभग शून्य प्रदूषण का संकेत देता है। सेमीकंडक्टर चिप और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) असेंबली जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य रोबोटिक आर्म्स द्वारा सटीकता से किए जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पॉलीमेटेक के डायरेक्टर विशाल नंदन बताते हैं, कि हमारे इंजीनियर नियमित शिफ्ट में काम नहीं करते। वे सिस्टम की निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर रोबोट को रीप्रोग्राम करते हैं। जितना काम 350 लोग मिलकर करेंगे, उतना 57 रोबोट कर रहे हैं। पूरी इकाई में गार्ड समेत केवल छह लोग तैनात रहते हैं, जिनमें दो तकनीकी विशेषज्ञ हैं।

‘डार्क फैक्ट्री’ का कॉन्सेप्ट नया नहीं है। दुनिया की पहली ऐसी इकाई 2001 में जापान की फेनक  ने स्थापित की थी, जो आज भी संचालन में है। इसके बाद दक्षिण कोरिया में भी इसी तरह की फैक्ट्री शुरू हुई। भारत में यह पहल विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का संकेत मानी जा रही है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की स्वचालित इकाइयां उत्पादन क्षमता, सटीकता और लागत नियंत्रण के लिहाज से लाभकारी हैं। हालांकि, इससे पारंपरिक रोजगार संरचना पर असर को लेकर बहस भी जारी है। कांचीपुरम की यह फैक्ट्री बताती है कि भविष्य का औद्योगिक मॉडल कैसा हो सकता है, जहां रोशनी कम और मशीनों की दक्षता ज्यादा होगी, और इंसानी भूमिका निगरानी व प्रोग्रामिंग तक सीमित रह जाएगी।

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