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एक साथ 125 विदेशी कंपनियों ने पाकिस्तान से समेट लिया अपना कारोबार

इस्लामाबाद। पिछले दिनों पाकिस्तान में एप्पल फोन को असेंबल करने के लिए प्लांट लगाने की चर्चाओं के बीच देश की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की शीर्ष कॉर्पाेरेट नियामक संस्था, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एसईसीपी) ने खुलासा किया है कि इस साल 20 जनवरी तक देश में 125 विदेशी कंपनियों ने औपचारिक रूप से अपना परिचालन बंद कर दिया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

एसईसीपी की रिपोर्ट के अनुसार, ये कंपनियां मुख्य रूप से ब्रांच और लियाजन ऑफिस के रूप में काम कर रही थीं। इनका संचालन कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और पेशावर जैसे पाकिस्तान के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से हो रहा था। इस सूची में शामिल कंपनियों का दायरा काफी व्यापक है, जिसमें ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैंकिंग, और विमानन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। बंद होने वाली कंपनियों की फेहरिस्त में दुनिया के कई बड़े नाम शामिल हैं। ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एक्सॉनमोबिल की सहायक इकाई ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से पैनासोनिक कॉरपोरेशन, विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लुफ्तान्सा जर्मन एयरलाइन्स, और टेक्नोलॉजी फर्म डेल ग्लोबल बीवी जैसी नामचीन कंपनियों ने भी पाकिस्तान से विदा ले ली है। बैंकिंग और इंजीनियरिंग क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ माश्रेक बैंक, टीसी जिरात बैंकासी, हैलीबर्टन लिमिटेड और दूसान हैवी इंडस्ट्रीज ने अपना काम बंद कर दिया है।

यह पलायन केवल एक या दो देशों तक सीमित नहीं है। सूची में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, यूएई, जापान, सिंगापुर, कनाडा और फ्रांस सहित कई देशों की फर्में शामिल हैं। यहाँ तक कि अमेरिकन सोयाबीन एसोसिएशन और पीस विंड्स जापान जैसे अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठनों ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। एसईसीपी ने स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों ने वॉलंटरी विंडिंग अप या अन्य कानूनी औपचारिकताओं के जरिए अपना परिचालन समाप्त किया है। हालांकि, नियामक ने कंपनियों के बाहर निकलने के सटीक कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में छाई आर्थिक अस्थिरता, मुद्रा का तेजी से होता अवमूल्यन, ऊर्जा संकट और राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह तोड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में विदेशी कंपनियों का जाना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी व्यापार करने की सुगमता केवल कागजों तक सीमित है। हाल के वर्षों में कई अन्य बड़ी कंपनियां भी देश छोड़ चुकी हैं, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति पाकिस्तान सरकार के उन दावों पर भी पानी फेरती नजर आ रही है, जिनमें निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की बात कही जा रही थी।

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