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हॉलमार्क के नाम पर करोड़ों की ठगी

नई दिल्ली । सोने के गहनों पर भरोसे की सबसे बड़ी पहचान हॉलमार्क मानी जाती है, लेकिन अब यही भरोसा ठगी का जरिया बनता जा रहा है। बाजार में नकली हॉलमार्क लगाकर ज्वेलर्स ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। रोजाना करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी सामने आ रही है और खरीददारों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईइस) ने 2 ग्राम से अधिक वजन के सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क यूनिक आईडी (एचयूआईडी) अनिवार्य कर रखी है। इसके बावजूद कई दुकानों पर फर्जी हॉलमार्क के साथ 22, 916 जैसी शुद्धता की मुहर लगाकर गहने बेचे जा रहे हैं। जांच में कई मामलों में 20-22 कैरेट बताकर बेचे गए गहने 14 या 16 कैरेट के निकले। इसका सीधा मतलब है कि 10 ग्राम सोने पर ही ग्राहक को 30 से 50 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है। फर्जी हॉलमार्क की पहचान करना आसान नहीं है। असली हॉलमार्क में बीआईएस का त्रिकोण चिन्ह, शुद्धता (जैसे 22ज्ञ916), छह अंकों की यूनिक एचयूआईडी और ज्वेलर की पहचान अंकित होती है। जबकि नकली हॉलमार्क में अक्सर यूनिक आईडी नहीं होती या गलत ढंग से उकेरी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहक गहना खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें और एचयूआईडी को बीआईएस के मोबाइल ऐप पर वेरिफाई करें। अधिकृत हॉलमार्किंग सेंटर पर भी जांच कराई जा सकती है।

त्योहारों और शादी के सीजन में खरीदारी बढ़ने के साथ ही ठगी के मामले भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक सतर्क रहें, केवल अधिकृत ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें और हर हाल में एचयूआईडी की जांच करें। भरोसे की यह छोटी-सी सावधानी लाखों की बचत करा सकती है।

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