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होर्मुज में नया समुद्री खेल खेल रहा पाकिस्तान

करांची। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर दी है। जानकारी के अनुसार, ईरान की नौसेना ने कुछ तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इसके लिए उन्हें अस्थायी रूप से पाकिस्तान के झंडे के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य किया गया। 

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने यह प्रस्ताव उन जहाजों को दिया जो लंबे समय से खाड़ी में फंसे हुए थे और मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर रहे थे। हालांकि पाकिस्तान के पास स्वयं क्षेत्र में बहुत कम जहाज हैं, इसलिए पाकिस्तान ने वैश्विक कमोडिटी कंपनियों से संपर्क कर इसतरह के जहाज ढूंढने शुरू किए जो अस्थायी रूप से पाकिस्तानी झंडे के तहत यात्रा कर सकें। विशेष रूप से बड़े तेल टैंकरों को प्राथमिकता दी गई, जिनकी क्षमता करीब बीस लाख बैरल तक होती है। इस पहल को पाकिस्तान और ईरान क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अब तक इस प्रस्ताव को व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया। इस पूरे घटनाक्रम में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की बढ़ती भूमिका दिखाई दे रही है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, आईआरजीसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। यह जहाजों से शुल्क वसूल रहा है और मित्र देशों को प्राथमिकता देकर विरोधी देशों के जहाजों को जोखिम में डाल रहा है।

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने हाल ही में एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर औपचारिक शुल्क लगाया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार जहाजों को अपनी पूरी जानकारी एक मध्यस्थ कंपनी के माध्यम से देनी होती है, जिसमें स्वामित्व, माल, चालक दल और मार्ग की जानकारी शामिल होती है। इसके बाद आईआरजीसी की नौसेना जांच करती है और अनुमति मिलने पर शुल्क वसूलकर विशेष कोड और मार्ग प्रदान करती है। भुगतान आम तौर पर प्रति बैरल तेल करीब एक डॉलर के आसपास होता है और युआन या स्थिर मुद्रा में किया जाता है।

हालांकि ईरान इस कदम को आत्मरक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ इस कानून को वैध नहीं मानते। सामान्यतः किसी देश को अपने तट से लगभग 22 किलोमीटर तक ही नियंत्रण का अधिकार होता है। इसके बावजूद ईरान ने यह दावा किया कि वह केवल उन जहाजों को अनुमति दे रहा है जो उसके लिए शत्रुतापूर्ण नहीं हैं। इस स्थिति ने जहाज मालिकों के लिए कानूनी और आर्थिक दुविधा खड़ी कर दी है। सुरक्षा जोखिम भी बढ़ रहा है। हाल के दिनों में कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। मार्च के अंत में कुवैती तेल टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे उसे गंभीर नुकसान पहुंचा। बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र में जहाज भेजने के लिए प्रीमियम भी बढ़ा दिए हैं।


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