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होर्मुज संकट में भारत का ‘संकटमोचक’ बना विझिंजम पोर्ट

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट और वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़े असर के बीच भारत का विझिंजम पोर्ट तेजी से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का अहम केंद्र बनकर उभर रहा है। इस पोर्ट को अब वैश्विक सप्लाई चेन के लिए “नया गेटवे” माना जा रहा है। दरअसल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज क्षेत्र में आवागमन बाधित होने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स का रुख भारत की ओर हुआ है। इसी कारण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विझिंजम पोर्ट पर जहाजों की आवाजाही में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पोर्ट अब ग्लोबल शिपिंग के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहा है। उनके अनुसार, होर्मुज संकट के चलते दुनिया सुरक्षित और स्थिर समुद्री मार्गों की तलाश कर रही है, जिसमें भारत की भूमिका बढ़ रही है।

यहां बताते चलें कि विझिंजम पोर्ट का उद्घाटन मई 2025 में हुआ था और इसे अडानी ग्रुप तथा राज्य सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है। यह भारत का पहला डीप-वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है, जिसकी गहराई लगभग 20 मीटर है, जिससे बड़े कंटेनर जहाज सीधे यहां आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोर्ट पर इस समय लगभग 100 जहाजों की आवाजाही या प्रतीक्षा दर्ज की गई है, जबकि मार्च 2026 में अकेले 61 जहाजों को हैंडल किया गया, जो अब तक का रिकॉर्ड माना जा रहा है। वर्तमान में इसकी क्षमता लगभग 10 लाख टीईयू है, जिसे भविष्य में 62 लाख टीईयू तक बढ़ाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भारत को बड़े जहाजों से सामान आयात करने के लिए कोलंबो या सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन विझिंजम के संचालन से यह निर्भरता काफी कम हो गई है। 

इस पोर्ट की बढ़ती भूमिका भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो विझिंजम आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब्स में शामिल हो सकता है। होर्मुज संकट के बीच विझिंजम की यह तेजी से बढ़ती अहमियत न केवल भारत की रणनीतिक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की नई भूमिका को भी मजबूत करती है। 


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