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ईरान ड्राइविंग सीट पर है-डगलस

वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री डगलस मैकग्रेगर ने मध्य पूर्व में जारी तनाव और संभावित युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मैकग्रेगर का मानना है कि इस समय ईरान रणनीतिक रूप से अधिक मजबूत स्थिति में है और वह ड्राइवर की सीट पर बैठा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप के सामने विकल्प सिमटते जा रहे हैं और उनके लिए अपमानजनक स्थिति पैदा होने की पूरी संभावना है।

मैकग्रेगर ने कहा कि ट्रंप की अंतिम कोशिश यह हो सकती है कि वे ईरान सरकार और वहां की जनता को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए भारी सैन्य शक्ति और विस्फोटकों का इस्तेमाल करें। हालांकि, उन्होंने इस सोच को विफल बताते हुए 1945 में जापान पर की गई बमबारी का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, भारी बमबारी से भी जापान ने रुख नहीं बदला था और अंततः परमाणु विकल्प का सहारा लेना पड़ा था। मैकग्रेगर का तर्क है कि ईरान के खिलाफ हवाई हमले वह परिणाम नहीं देंगे जिसकी ट्रंप उम्मीद कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि ईरानी राष्ट्र उनके सामने आत्मसमर्पण कर दे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा होना असंभव प्रतीत होता है।

पूर्व रक्षा मंत्री ने ट्रंप की सैन्य सोच को द्वितीय विश्व युद्ध की पुरानी सोच का सबसे बुरा उदाहरण करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्ति 21वीं सदी के आधुनिक युद्धक तंत्र पर आधारित है, जिसमें उन्नत मिसाइलें, मानवरहित ड्रोन सिस्टम और सटीक अंतरिक्ष निगरानी शामिल है। यह तकनीक बिना किसी रुकावट के काम कर रही है, जिससे अमेरिका के लिए पारंपरिक हवाई अभियान चलाना जोखिम भरा हो सकता है। मैकग्रेगर ने अंदेशा जताया है कि पांच दिनों के प्रस्तावित सीजफायर के पीछे अमेरिका एक बड़े हवाई हमले की तैयारी कर रहा है। ट्रंप और उनके सलाहकारों को उम्मीद है कि इस भीषण हमले से ईरानी राज्य पूरी तरह बिखर जाएगा और युद्ध समाप्त हो जाएगा, लेकिन मैकग्रेगर इसे एक गलत अनुमान मानते हैं। इससे पहले भी मैकग्रेगर ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की चर्चा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप को पाकिस्तान के बजाय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात सुननी चाहिए। मैकग्रेगर के अनुसार, ट्रंप का वर्तमान लक्ष्य अब कोई बड़ी सैन्य जीत हासिल करना नहीं, बल्कि किसी तरह अपनी गिरती राजनीतिक छवि को बचाना रह गया है। उन्होंने आशंका जताई है कि युद्धविराम समाप्त होते ही संघर्ष और अधिक भीषण रूप ले सकता है।

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