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ईरान-इजरायल संघर्ष लंबा खिंचा तो दुबई में पड़ जाएंगे खाने-पीने के लाले

रियाद। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान तथा इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर दुबई में खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, शहर में ताजा फल और सब्जियों का भंडार सीमित रह गया है और यदि समुद्री व्यापार जल्द सामान्य नहीं हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि दुबई के पास ताजा खाद्य पदार्थों का केवल 8 से 10 दिन का स्टॉक बचा था। बताया जा रहा है कि 7 मार्च तक यह भंडार घटकर करीब आठ दिनों का रह गया था। इसका मुख्य कारण स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज का बंद होना बताया जा रहा है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषक शनाका एंस्लेम परेरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ स्टीफन पॉल के बयान का हवाला देते हुए कहा, कि सप्लाई चेन डेटा के आधार पर दुबई में खाद्य भंडार सीमित अवधि के लिए ही उपलब्ध है। पॉल ने एक बातचीत में बताया, कि दुबई की खाद्य आपूर्ति मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है और मौजूदा हालात में आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढ़ गया है। 

आयात पर निर्भरता बड़ा कारण 

खाड़ी देशों की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वे अपनी जरूरत का लगभग 80 से 90 प्रतिशत खाद्य पदार्थ दूसरे देशों से आयात करते हैं। गल्फ कॉर्पोरेशन कॉंसिल के सदस्य देशों की करीब 70 प्रतिशत खाद्य आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो व्यापार और आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने इन आशंकाओं के बीच जनता को भरोसा दिलाया है कि देश के पास आवश्यक वस्तुओं का 4 से 6 महीने तक का रणनीतिक भंडार मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार आपूर्ति को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों और साधनों का उपयोग कर रही है। इसी कड़ी में प्रमुख रिटेल कंपनी लुलु ग्रुप इंटरनेशनल ने भी आपूर्ति बनाए रखने के लिए चार्टर्ड कार्गो विमानों के जरिए भारत सहित अन्य देशों से ताजा फल और सब्जियां मंगाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम हुआ और समुद्री व्यापार फिर से सामान्य हुआ तो स्थिति जल्द नियंत्रित हो सकती है, लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को खाद्य आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

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