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ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए तो खत्म हो जाएगा मध्य एशिया-ट्रंप

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हाल ही में किए गए हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सैन्य अभियान न केवल अमेरिका के हित में था बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक हो गया था। ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले के बाद अब ईरान परमाणु हथियारों के निर्माण के बारे में सोच भी नहीं पाएगा क्योंकि उसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु संपन्न बनने से रोकना पूरी दुनिया की शांति सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य कदम था।

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि हालांकि उन्हें युद्ध करना पसंद नहीं हैए लेकिन ईरान की वर्तमान सरकार ने अक्षम्य अपराध किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन ने कुछ ही हफ्तों के भीतर 32ए000 प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया। परमाणु खतरे पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होतेए तो वह महज एक घंटे या एक दिन के भीतर उनका इस्तेमाल कर पूरे मध्य एशिया को तबाह कर सकता था। ट्रंप के अनुसारए अमेरिकी अभियान ने ईरानी सेना की कमर तोड़ दी है और यह कदम वैश्विक शांति बनाए रखने के व्यापक उद्देश्य से प्रेरित था। अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई को पूरे विश्व के नजरिए से सही ठहराया है।

जब व्हाइट हाउस की शीर्ष प्रवक्ता से अन्य देशों के परामर्श और उनके सैनिकों के जोखिम को लेकर सवाल किया गयाए तो उन्होंने तर्क दिया कि ईरानी शासन को निशस्त्र करने के ट्रंप के प्रयासों से पूरी दुनिया को सीधा लाभ हो रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पश्चिमी जगत वर्षों से इस बात पर सहमत रहा है कि ईरान एक बड़ा खतरा है। उन्होंने राष्ट्रपति के उस आह्वान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने और ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाने में मदद करने की अपील की है। इस सैन्य कार्रवाई और उसके बाद के घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि चीनए फ्रांसए जापानए दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशए जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित हो सकते हैंए अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में भेजेंगे। एक साक्षात्कार में ट्रंप ने नाटो को भी चेतावनी दी कि यदि इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलीए तो यह गठबंधन के भविष्य के लिए घातक होगा। फिलहालए यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री इस मांग पर चर्चा कर रहे हैं। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने स्पष्टता की मांग करते हुए कहा है कि अमेरिका और इजराइल को यह बताना चाहिए कि वे अपने सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति कब तक देखते हैं।


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