Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

ईरान को भीतर से खोखला करने की रणनीति

वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक ऐसी शतरंज की बिसात में तब्दील हो चुका है, जहां अमेरिका सीधे सैन्य हमले के बजाय ईरान को भीतर से खोखला करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

पिछले 48 घंटों में ईरान पर अमेरिका की ओर से कोई सीधा अटैक नहीं किया जाना किसी इत्तेफाक के बजाय एक बेहद खतरनाक और सोची-समझी प्लानिंग का हिस्सा माना जा रहा है। वॉशिंगटन और यरूशलेम इस वक्त केवल मिसाइलों के भरोसे नहीं, बल्कि ईरान के पावर कॉरिडोर में फैले अपने उस जासूसी जाल पर दांव लगा रहे हैं, जिसने तेहरान की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगा दी है। वर्तमान में ईरान अपनी ही जमीन पर असुरक्षित महसूस कर रहा है। इजराइल और अमेरिका के जासूस ईरान के भीतर इस कदर सक्रिय हो चुके हैं कि सैन्य और रणनीतिक निर्णयों की खबर पल-भर में लीक हो रही है। इसी घबराहट और आंतरिक कलह के बीच ईरान ने हाल ही में 500 से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इसके बावजूद सूचनाओं के प्रवाह को रोकने में वह विफल नजर आ रहा है। अमेरिका और इजराइल का पूरा फोकस अब ‘इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशंस’ पर है, ताकि बड़े युद्ध के विनाश से बचते हुए सीधे ईरान की शीर्ष लीडरशिप को निशाना बनाया जा सके।

जिस तरह से हालिया हमलों में अली लारीजानी और बसीज कमांडर जैसे बड़े चेहरों को निशाना बनाया गया, वह इसी सटीक खुफिया जानकारी का नतीजा था। अमेरिका अब आमने-सामने की जंग के बजाय ‘सर्जिकल स्ट्राइक’के अंदाज में सरप्राइज अटैक कर रहा है। इस रणनीति का मूल मंत्र है सांप का सिर कुचल दो, शरीर अपने आप बेजान हो जाएगा। पश्चिमी शक्तियों का मानना है कि यदि ईरान की कमान संभालने वाली शीर्ष लीडरशिप को खत्म कर दिया जाए, तो उसके लिए संगठित युद्ध लड़ना नामुमकिन हो जाएगा। साथ ही, अमेरिका इस वक्त इंतजार करो और देखो की नीति अपना रहा है। रणनीतिकारों का मानना है कि ईरान के हथियारों और मिसाइलों का भंडार तेजी से घट रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने कीमती ड्रोन और मिसाइलें उन लक्ष्यों पर बर्बाद कर दे, जिनका सामरिक महत्व कम है। एक बार जब ईरान का गोला-बारूद खत्म हो जाएगा, तब अमेरिका के लिए जमीनी कार्रवाई करना बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा। युद्ध के बीच यह 48 घंटे की शांति किसी बड़े तूफान का संकेत हो सकती है। संभव है कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना इस समय का उपयोग हथियारों की री-स्टॉकिंग, री-फ्यूलिंग और टारगेट की नई लिस्टिंग के लिए कर रहे हों। जैसे ही ईरान के रक्षा तंत्र में थकान और हथियारों की कमी दिखेगी, अमेरिकी स्पेशल फोर्स की हलचल ईरान की जमीन पर बढ़ सकती है।

Comments (0)

Leave a Comment