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ईरान से जंग रोकने की अपील

रियाद । इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैलता दिख रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई देशों की हवा बारूद और धुएं से प्रभावित हो रही है। इसी बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है। इसके पहले संयुक्त बैठक रियाद में आयोजित हुई, जहां सऊदी अरब सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद जारी बयान में सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, सीरिया, तुर्किए, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों ने एकजुट होकर ईरान की सैन्य कार्रवाई की निंदा की।

विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने हाल के हमलों में रिहायशी इलाकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाया। इसमें तेल और गैस प्लांट, एयरपोर्ट, डीसेलिनेशन प्लांट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और राजनयिक ठिकाने शामिल हैं। उनका कहना है कि इस तरह के हमले न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा हैं। यह बयान तब आया है जब इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। ईरान के हमलों से रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में आग लगने की खबरें आईं, जबकि सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया। संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ईरान के साथ संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अन्य देशों की संप्रभुता का कितना सम्मान करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल देना या सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाना स्वीकार्य नहीं होगा। इसके साथ ही मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायली हमलों की भी निंदा की और क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और अखंडता बनाए रखने के लिए समर्थन जताया। यानी इस बयान में दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।

दूसरी ओर, कतर ने अपने यहां हुए हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कतर ने रास लाफान क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। कतर सरकार ने ईरानी दूतावास के कुछ अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। यह कदम किसी भी देश द्वारा बेहद सख्त राजनयिक कार्रवाई माना जाता है। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह शुरू से ही इस संघर्ष से दूर रहने की नीति पर चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसे निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील है कि सभी पक्ष संयम बरतें और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि बड़े संकट को टाला जा सके।

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