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इस्लामाबाद में अमन की बिसात

इस्लामाबाद। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू हो रही है। इस बैठक में ईरान की ओर से 6 और अमेरिका की ओर से 4 मुख्य प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं। वहीं, ईरान के 70 सदस्यीय दल में आर्थिक और सुरक्षा विशेषज्ञ भी शामिल हैं। वार्ता का मुख्य उद्देश्य 8 अप्रैल से लागू अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना है। हालांकि, ईरान ने अपनी सीज संपत्तियों को मुक्त करने जैसी शर्तें रखी हैं, वहीं अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर कड़ा रुख अपनाया है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।


वार्ता का हिस्सा 6 ईरानी दिग्गज

शांति वार्ता में ईरान की तरफ से 6 दिग्गज शामिल होने जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस वार्ता का नेतृत्व करेंगे। वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ भी मीटिंग अटेंड करेंगे। दोनों दिग्गज वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच गए हैं, इसकी जानकारी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर दी है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती भी इस बातचीत में शामिल होंगे। इसके अलावा, अनुभवी राजनयिक मजीद तख्त रवांची और सुरक्षा मामलों के जानकार मोहम्मद बागेर जोल्घाद्र भी वार्ता का हिस्सा बन सकते हैं।


ईरानी डेलीगेशन में 70 लोग शामिल

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि गलिबाफ और अराघची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया है। इस डेलीगेशन में आर्थिक, सुरक्षा और राजनीतिक क्षेत्रों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ मीडियाकर्मी और सहायक कर्मचारियों सहित लगभग 70 सदस्य शामिल हैं।मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की है।  उन्होंने अपने डेलीगेशन का नाम मीनाब 168 रखा है। ये नाम ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले की याद में दिया गया है, जिसमें 168 बच्चों की मौत हो गई थी। इस नाम के जरिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के दौरान उन मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उस घटना की याद दिला रहा है।

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